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उत्तर प्रदेश: सरस्वती विद्या मंदिर में RSS शताब्दी वर्ष पर भव्य हिंदू सम्मेलन हुआ आयोजित
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आज दिनांक 13 जनवरी 2026 को सरस्वती विद्या मंदिर, खुर्जा में प्रातः 11 बजे एक भव्य हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आज दिनांक 13 जनवरी 2026 को सरस्वती विद्या मंदिर, खुर्जा में प्रातः 11 बजे एक भव्य हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में हिन्दू समाज के गणमान्य नागरिक, मातृशक्ति एवं युवा वर्ग की सहभागिता रही। सम्मेलन के मुख्य अतिथि पूजनीय स्वामी दीपांकर जी महाराज, मुख्य वक्ता श्री गुणवन्त कोठरी जी (अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य) तथा कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. आयुषी राणा जी रहे। अपने ओजस्वी उद्बोधन में पूजनीय स्वामी दीपांकर जी महाराज ने कहा कि हिन्दू समाज की सबसे बड़ी शक्ति उसकी एकता है। जब तक समाज जाति, भाषा और क्षेत्र के भेदों से ऊपर उठकर संगठित नहीं होगा, तब तक वह सशक्त नहीं बन सकता। सनातन संस्कृति केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि सेवा, संस्कार और स्वाभिमान का मार्ग है। उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि इतिहास को जानें, सत्य को समझें और जब धर्म, संस्कृति व राष्ट्र पर प्रश्न उठे तो मौन नहीं, मुखर बनें। दीपाकर स्वामी योग गुरु ने स्पष्ट शब्दों में कहा— “आज हिन्दू समाज को भावुक नहीं, संगठित और साहसी बनना होगा। अब एक ही पहचान होगी—पहले हिन्दू, फिर सब कुछ।” अंत में उन्होंने कहा कि “आप सब से मैं यही दक्षिणा लेकर जा रहा हूँ कि हम जाति में नहीं, केवल हिन्दू बनकर रहें।” बांग्लादेश में देखिए कि दीपू शर्मा जी को जिन्दा जला दिया गया। क्योंकि उसका दोष यह था केवल हिन्दू। इसाई क बच्चा इसाई पैदा होता है। मुसलमान का बच्चा मुस्लमान पैदा होता है लेकिन हिन्दू का बच्चा पैदा होता है वह केवल बनिया, ब्राह्मण, राजपूत, जाट, जाटव, बाल्मीकि पैदा होता है केवल हमें हिन्दू ही पैदा होना चाहिये। जिस दिन हिंदू एक हो जाएगा उसे दिन मैं भिक्षा मांगना बंद कर दूंगा। एक ही संकल्प बस हिन्दू। हिन्दू हिन्दू भाई भाई। मुख्य वक्ता श्री गुणवन्त कोठारी जी ने अपने संबोधन में कहा कि हिन्दू समाज कोई पंथ नहीं, बल्कि एक जीवन-दृष्टि है, जिसने विश्व को वसुधैव कुटुम्बकम् का संदेश दिया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का उद्देश्य सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज को संगठित करना है। उन्होंने कहा कि “संघ व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण की यात्रा करता है।” उन्होंने कहा कि यह शताब्दी वर्ष उत्सव नहीं, बल्कि संकल्प का समय है। कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. आयुषी राणा जी ने कहा कि हिन्दू समाज कोई संप्रदाय नहीं, बल्कि एक जीवन-पद्धति है। हमारी पहचान कर्तव्य, संस्कार और राष्ट्रबोध से होती है। पंच परिवर्तन—सामाजिक समरसता, कुटुम्ब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी और नागरिक कर्तव्य—आज के युग की अनिवार्य आवश्यकता हैं। यदि हिन्दू समाज जागृत, संगठित और चरित्रवान बनेगा, तो भारत स्वतः विश्वगुरु बनेगा। कार्यक्रम में संघ एवं राष्ट्र विषयक साहित्य का स्टॉल भी लगाया गया, जहाँ उपस्थित जनों को देश, समाज और संघ से संबंधित प्रेरक साहित्य उपलब्ध कराया गया। कार्यक्रम का समापन “जय हिन्दू समाज” एवं “भारत माता की जय” के उद्घोष के साथ हुआ। कार्यक्रम मे विभाग प्रचारक विकास जी लोकेश जी, उमेश जी, सुदर्शन जी, राकेश जी, नेत्रपाल जी, हैप्पी जी, निशांत जी, विवेक जी, दीपक जी, संचित जी, राम दिवाकर जी ओर अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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