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उत्तर प्रदेश: चंगाई सभा के नाम पर पत्रकारों को फंसाने की साजिश का खुलासा
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: ग्राम पंचायत रामपुर के आसे नवादा में धर्म की आड़ में चल रहे एक बड़े खेल और पत्रकारों को बदनाम करने की साजिश का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। NCR समाचार की पड़ताल में यह साफ हो गया है कि भारतीय हिंदू सरकार के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर राघवेंद्र प्रताप सिंह, पत्रकार
विस्तार
उत्तर प्रदेश: ग्राम पंचायत रामपुर के आसे नवादा में धर्म की आड़ में चल रहे एक बड़े खेल और पत्रकारों को बदनाम करने की साजिश का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। NCR समाचार की पड़ताल में यह साफ हो गया है कि भारतीय हिंदू सरकार के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर राघवेंद्र प्रताप सिंह, पत्रकार अनमोल यादव और अनुभव शाक्य पर लगे ₹20,000 की उगाही के आरोप पूरी तरह झूठे और निराधार हैं। साजिश के मास्टरमाइंड: भगवान शरण शर्मा और रामभरोसे श्रीवास्तव पड़ताल में सामने आया है कि इस पूरी साजिश के पीछे भगवान शरण शर्मा और रामभरोसे श्रीवास्तव मास्टरमाइंड के तौर पर काम कर रहे हैं। इन्हीं के संरक्षण में इलाके में 'चंगाई सभा' (धार्मिक सभा) का आयोजन किया जा रहा था। जब पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पर सवाल उठाए, तो उन्हें चुप कराने के लिए झूठे मुकदमे की पटकथा लिखी गई। दबाव और धोखे से लिए गए अंगूठे और साइन ग्रामीण महिलाओं ने कैमरे पर स्वीकार किया कि मास्टरमाइंड भगवान शरण शर्मा और मुनीता देवी ने उन पर दबाव बनाया। महिलाओं को मामले की असलियत बताए बिना, उनसे प्रार्थना पत्र पर साइन और अंगूठे लगवा लिए गए। ग्रामीणों को अंधेरे में रखा गया कि शिकायत किस बारे में है; उन्हें केवल 'सत्संग' बचाने का झांसा दिया गया था। बिना पड़ताल के 'स्वदेशराज' ने छापी खबर इस मामले में पत्रकारिता की नैतिकता पर भी सवाल खड़े हुए हैं। स्वदेशराज न्यूज पेपर और जैसे संस्थानों ने बिना तथ्यों की जांच किए और बिना दूसरा पक्ष जाने, एकतरफा और झूठे आरोपों वाली खबर प्रकाशित कर दी। इन खबरों के जरिए ठाकुर राघवेंद्र प्रताप सिंह और पत्रकारों की छवि धूमिल करने की कोशिश की गई। जब NCR समाचार के पत्रकार ने जमीन पर जाकर उन महिलाओं और ग्रामीणों से बात की जिनके नाम शिकायत पत्र में थे, तो सच सामने आ गया। महिलाओं ने साफ कहा पत्रकारों ने कोई पैसा नहीं मांगा। मुनीता देवी और भगवान शरण शर्मा ने उन्हें गुमराह किया। वे पत्रकारों को ठीक से जानती भी नहीं हैं। यह मामला केवल एक झूठी शिकायत का नहीं, बल्कि 'चंगाई सभा' जैसे आयोजनों को बचाने के लिए कानून और मीडिया के दुरुपयोग का है। निर्दोष लोगों और पत्रकारों को बदनाम करने की इस साजिश के बाद अब प्रशासन से इन मास्टरमाइंडों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है।
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