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उत्तर प्रदेश: लोकायुक्त की जांच दूसरे मंडल की एजेंसी को सौंपने की करी मांग, अभिलेख गायब होने का लगा आरोप

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उत्तर प्रदेश  Published by: Irshad Ahmad , उत्तर प्रदेश  Edited By: Shubhi Shikha Nayal, Date: 23/07/2026 05:05:33 pm Share:
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  • Edited By.: Shubhi Shikha Nayal,
  • Date:
  • 23/07/2026 05:05:33 pm
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: संतकबीरनगर में सेमरियावां निवासी सलीम उमर ने मा० लोक आयुक्त एवं उप लोक आयुक्त, उत्तर प्रदेश को प्रार्थना पत्र भेजकर परिवाद संख्या 1680/2023 की जांच जनपद संतकबीरनगर से हटाकर किसी अन्य मंडल स्तर की टीएसी (TAC) अथवा एसटीएफ से कराने की मांग की है। प्रार्थना पत्र में सलीम उमर ने आरोप लगाया है कि जिलाधिकारी संतकबीरनगर द्वारा गठित जांच समिति ने शिकायत में शामिल विकास कार्यों की जांच बिना अभिलेखों के ही कर दी।

विस्तार

उत्तर प्रदेश: संतकबीरनगर में सेमरियावां निवासी सलीम उमर ने मा० लोक आयुक्त एवं उप लोक आयुक्त, उत्तर प्रदेश को प्रार्थना पत्र भेजकर परिवाद संख्या 1680/2023 की जांच जनपद संतकबीरनगर से हटाकर किसी अन्य मंडल स्तर की टीएसी (TAC) अथवा एसटीएफ से कराने की मांग की है। प्रार्थना पत्र में सलीम उमर ने आरोप लगाया है कि जिलाधिकारी संतकबीरनगर द्वारा गठित जांच समिति ने शिकायत में शामिल विकास कार्यों की जांच बिना अभिलेखों के ही कर दी। उनका कहना है कि कई ग्राम पंचायत सचिवों और ग्राम प्रधानों ने लिखित रूप से यह प्रमाणित किया है कि संबंधित अभिलेख उपलब्ध नहीं थे, इसके बावजूद जांच रिपोर्ट में केवल फोटो संलग्न कर रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी गई, जिस पर उन्होंने गंभीर आपत्ति जताई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि ग्राम पंचायत में तैनात रहे ग्राम पंचायत अधिकारी, ग्राम विकास अधिकारी और ग्राम सचिवों ने आपसी मिलीभगत से पत्रावलियों को नष्ट अथवा गायब कर दिया। ऐसे में जब जांच टीम के पास मूल अभिलेख ही उपलब्ध नहीं थे, तो जांच किस आधार पर की गई, यह गंभीर सवाल है। सलीम उमर का आरोप है कि प्रस्तुत जांच आख्या तथ्यहीन, असत्य और अभिलेखविहीन है तथा भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों को बचाने के उद्देश्य से तैयार की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि अभिलेख गायब होने के बावजूद अब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है। प्रार्थी ने लोकायुक्त से मांग की है कि निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए इस मामले की जांच किसी अन्य मंडल स्तर की टीएसी अथवा एसटीएफ से कराई जाए। उनका कहना है कि वर्तमान जांच रिपोर्ट पर प्रभावी प्रत्युत्तर देना संभव नहीं है, क्योंकि यह मूल अभिलेखों के अभाव में तैयार की गई है।


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