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Yamuna News: यमुना में जहरीला झाग बढ़ा, प्रदूषण के कारण पक्षियों का ठिकाना बदल गया
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संक्षेप
दिल्ली: यमुना नदी में झाग की बढ़ती परत और बढ़ते जल प्रदूषण ने पक्षियों समेत नदी के पारिस्थितिक तंत्र को प्रभावित कर दिया है, जिससे पहले यमुना किनारे ठहरने वाले कई प्रकार के पक्षी अब अपने ठिकाने छोड़क
विस्तार
दिल्ली: यमुना नदी में झाग की बढ़ती परत और बढ़ते जल प्रदूषण ने पक्षियों समेत नदी के पारिस्थितिक तंत्र को प्रभावित कर दिया है, जिससे पहले यमुना किनारे ठहरने वाले कई प्रकार के पक्षी अब अपने ठिकाने छोड़कर अन्य सुरक्षित स्थानों की ओर उड़ रहे हैं। यह स्थिति स्थानीय पर्यावरणविदों, पक्षी प्रेमियों तथा शोधकर्ताओं के बीच चिंता का विषय बन चुकी है। हालिया पर्यवेक्षण और रिपोर्टों के अनुसार यमुना नदी में सफेद झाग की परत के कारण यहां आने वाले विदेशी और प्रवासी पक्षियों की संख्या में गिरावट दर्ज की जा रही है। यह झाग नदी के पानी की गुणवत्ता के खराब होने का संकेत है, जिसके परिणामस्वरूप जीव‑जंतु और पक्षी अधिक स्वच्छ और सुरक्षित आवास की तलाश में नदी से दूर जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस झाग के निर्माण का मुख्य कारण अविनाशी सीवेज, औद्योगिक और घरेलू प्रदूषण, तथा रसायनों (जैसे डिटर्जेंट और फॉस्फेट युक्त पदार्थ) का नदी में मिलना है। इन रसायनों की प्रतिक्रिया पानी और हवा के संपर्क में आने पर झाग उत्पन्न करती है, जो सतह पर ऐसी मोटी परत बनाती है कि यह पारिस्थितिकीय रूप से घातक साबित हो सकती है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यमुना में untreated sewage और रसायनों का मिश्रण नदी की आक्सीजन की मात्रा को कम करता है और झाग के कारण वॉटरबर्ड व अन्य पक्षियों के लिए अनुकूल आवास उपलब्ध नहीं रहता। यह परिस्थितियाँ पक्षियों को अन्य जगहों पर प्रवास करने पर मजबूर कर रही हैं। हर साल विशेषकर ओकटूबर‑नवंबर और छठ पूजा जैसे मौसमों में यमुना नदी में झाग का उत्पन्न होना आम देखा जाता है, क्योंकि इन समयों में पानी का प्रवाह कम रहा है और प्रदूषक अधिक जमते हैं, जिससे झाग स्थिर रहता है।
अधिकारी और विशेषज्ञ दोनों ने सुझाव दिया है कि नदी में सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता बढ़ाई जाए। untreated waste को प्रवाह में होने से रोका जाए, और औद्योगिक कचरे के निपटान पर सख्ती से निगरानी रखी जाए ताकि इस समस्या का समाधान किया जा सके और यमुना में पक्षियों समेत अन्य जीव‑जन्तुओं का ठिकाना फिर सुरक्षित बनाया जा सके। यह समस्या यमुना नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है और यदि प्रदूषण नियंत्रण के प्रभावी उपाय नहीं किए गए तो नदी के जैव विविधता पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ने का खतरा है।
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