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बिहार: सावन के पहले सोमवार और मैना पंचमी पर मां विषहरा स्थान में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
- Photo by : social media
संक्षेप
बिहार: इस साल सावन के पहला सोमवारी और मैना पंचमी (मधुश्रावणी पर्व की शुरुआत) दोनों एक ही दिन होने के कारण सभी श्रद्धालुओं और नवविवाहितों में मां विषहरा पूजन की भीड़ उमड़ पड़ी सहरसा जिला के बसौना, दिवारी गांव स्थित मां विषहरा स्थान में सुबह से शाम तक बहुत भीड़ देखने को मिला।
विस्तार
बिहार: इस साल सावन के पहला सोमवारी और मैना पंचमी (मधुश्रावणी पर्व की शुरुआत) दोनों एक ही दिन होने के कारण सभी श्रद्धालुओं और नवविवाहितों में मां विषहरा पूजन की भीड़ उमड़ पड़ी सहरसा जिला के बसौना, दिवारी गांव स्थित मां विषहरा स्थान में सुबह से शाम तक बहुत भीड़ देखने को मिला। कवयित्री चांदनी झा मां विषहरा स्थान के मान्यता के बारे में बताती है उनके पूर्वज बता रहे थे मां विषहरा उन लोगों की भूमि पर ही अपने आप प्रकट हुई थी और फिर स्वप्न के द्वारा मां बताई थी कि हम इस जगह है फिर वहां पर सभी के द्वारा मंदिर का निर्माण करवाया गया।ये देश का एकमात्र ऐसा जगह है जहां पर शिव की पांचो पुत्री जया, विषहरा, शामिलबारी, दौतलि ,देव एक साथ पांचों बहन कुवांरी अवस्था में विराजमान है, हालांकि हाल ही के 2-3 वर्ष पहले शिवपुत्री माता मनसा देवी की प्रतिमा की भी स्थापना की गई है। पहले यहां एक कुआं था जिसके मान्यता के बारे में बताया जाता था की नाग नागिन रात को वहां पर नृत्य करती है, हालांकि अब तालाब में नाग नागिन देवता रहते हैं। बसौना गांव की कुलदेवी रहने के कारण मैंना पंचमी में बसौना के प्रत्येक घर से माता रानी को दूध और लावा चढ़ाना अनिवार्य है, हालांकि बहुत दूर-दूर से श्रद्धालु भी आते हैं।
सावन में यहां पर कुंवारी कन्या और ब्राह्मण को खीर भोजन करवाया जाता तब इस क्षेत्र में बारिश की शुरुआत होती है नहीं तो अकाली के कारण फसल जलते रहते हैं खीर भोजन के बाद बहुत तेज वर्षा होना शुरू हो जाता है। माता रानी को प्रसाद के रूप में दूध लावा और बताशा बहुत प्रिय है। यहां पांचो बहन कुंवारी अवस्था में विराजमान होने के कारण माता रानी को सिंदूर नहीं लगाया जाता है। और कहां जाता है की माता रानी की कृपा से इस क्षेत्र में नाग- नागिन देवता का कोई दुष्प्रभाव देखने को नहीं मिलता है। यहां पर दुर्गा पूजा में कई देवी,डायन की भक्तिन सब मंत्र सिद्ध करती है। यहां पर प्रत्येक मंगलवार ,सावन में बहुत बड़ी मेला लगती है जो पूरे सावन में रहती हैं,रक्षाबंधन में और भव्य रूप ले लेती है, इस मेले का समापन रक्षाबंधन के दो दिन बाद होता है।
