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मध्य प्रदेश: बेटी के जन्मदिन पर पौधारोपण की अनोखी पहल, आरक्षक मनोज ने पेश की मिसाल

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मध्य प्रदेश  Published by: Ajay Singh Tomar , मध्य प्रदेश  Edited By: Kunal Tewatia, Date: 04/08/2026 01:37:04 pm Share:
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  • Published by.: Ajay Singh Tomar ,
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  • 04/08/2026 01:37:04 pm
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संक्षेप

मध्य प्रदेश: पर्यावरण संरक्षण औ बेटी सम्मान को एक साथ जोड़कर समाज को सकारात्मक संदेश देने का कार्य नगरा थाने में पदस्थ आरक्षक मनोज पिछले पांच वर्षों से लगातार कर रहे हैं।

विस्तार

मध्य प्रदेश: पर्यावरण संरक्षण औ बेटी सम्मान को एक साथ जोड़कर समाज को सकारात्मक संदेश देने का कार्य नगरा थाने में पदस्थ आरक्षक मनोज पिछले पांच वर्षों से लगातार कर रहे हैं। अपनी बेटी तमन्ना के जन्मदिन को वे केवल पारिवारिक उत्सव तक सीमित नहीं रखते, बल्कि इस अवसर को समाज और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का माध्यम बनाते हैं। इसी कड़ी में सोमवार को उन्होंने नवीन सिविल अस्पताल, पोरसा परिसर में बरगद का एक छायादार पौधा रोपित किया। इस अवसर पर उन्होंने लोगों से भी अपने बच्चों के जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ और अन्य शुभ अवसरों पर पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का आह्वान किया।

आरक्षक मनोज ने बताया कि उनकी पुत्री तमन्ना अब पांच वर्ष की हो चुकी है। बेटी के जन्म के समय ही उन्होंने संकल्प लिया था कि उसके प्रत्येक जन्मदिन पर एक छायादार एवं पर्यावरण के लिए उपयोगी पौधा अवश्य लगाएंगे। तब से लेकर आज तक यह सिलसिला बिना रुके जारी है। अब तक वे पीपल, बरगद, पाखर, गूलर और कदम जैसे ऑक्सीजन देने वाले तथा लंबे समय तक छाया प्रदान करने वाले पौधे विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर लगा चुके हैं। उनका मानना है कि पौधे केवल पर्यावरण को सुरक्षित नहीं रखते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन का आधार भी बनते हैं।

उन्होंने कहा कि आज समाज में बेटियों ने हर क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित की है। शिक्षा, प्रशासन, चिकित्सा, सेना, न्यायपालिका, खेल, विज्ञान, राजनीति और उद्योग जैसे क्षेत्रों में बेटियां लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। ऐसे में बेटियों को बोझ समझने की मानसिकता बदलने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि परिवार की खुशहाली, संस्कार और सामाजिक विकास में बेटियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यदि उन्हें समान अवसर और उचित शिक्षा मिले तो वे परिवार ही नहीं, पूरे देश का नाम रोशन कर सकती हैं।
मनोज ने कहा कि पौधा लगाना आसान है, लेकिन उसे वृक्ष बनाना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। इसी सोच के साथ वे प्रत्येक पौधे की नियमित देखरेख करते हैं। समय-समय पर पानी देना, पौधों के चारों ओर सुरक्षा घेरा बनवाना, सफाई कराना और आवश्यकता पड़ने पर खाद डालना भी वे स्वयं सुनिश्चित करते हैं। उनका कहना है कि यदि लगाए गए पौधों की देखभाल नहीं की जाए तो पौधारोपण का उद्देश्य अधूरा रह जाता है। इसी कारण उन्होंने अब तक लगाए गए अधिकांश पौधों को सुरक्षित और विकसित करने का प्रयास किया है।

उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि यदि प्रत्येक परिवार अपने बच्चों के जन्मदिन पर कम से कम एक पौधा लगाए और उसकी जिम्मेदारी भी निभाए तो कुछ वर्षों में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा परिवर्तन देखने को मिलेगा। इससे बच्चों में भी प्रकृति के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी तथा वे बचपन से ही पर्यावरण संरक्षण का महत्व समझेंगे। स्थानीय नागरिकों ने आरक्षक मनोज की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान समय में जहां लोग जन्मदिन पर अनावश्यक खर्च करते हैं, वहीं मनोज समाज के लिए एक स्थायी और प्रेरणादायक संदेश दे रहे हैं। उनका यह प्रयास केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे महत्वपूर्ण विषयों को भी मजबूती से जोड़ता है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि सरकारी कर्मचारी, जनप्रतिनिधि, शिक्षक, व्यापारी और आम नागरिक भी इस तरह की पहल अपनाएं तो शहर और गांव दोनों हरियाली से आच्छादित हो सकते हैं। साथ ही समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच को भी नई मजबूती मिलेगी। आरक्षक मनोज की यह पहल निश्चित रूप से उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो छोटे-छोटे प्रयासों के माध्यम से समाज और पर्यावरण में बड़ा बदलाव लाना चाहते हैं।