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राजस्थान: सम्मेद शिखर जी पहुंचे 121 श्रद्धालुओं का दल, तीन पीढ़ियों की भक्ति बनी आकर्षण
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संक्षेप
राजस्थान: दिगंबर जैन पदयात्रा संघ, जयपुर द्वारा आयोजित धार्मिक यात्रा के अंतर्गत 121 श्रद्धालुओं का दल पवित्र तीर्थराज श्री सम्मेद शिखर जी पहुंचा।
विस्तार
राजस्थान: दिगंबर जैन पदयात्रा संघ, जयपुर द्वारा आयोजित धार्मिक यात्रा के अंतर्गत 121 श्रद्धालुओं का दल पवित्र तीर्थराज श्री सम्मेद शिखर जी पहुंचा। संघ के संरक्षक सुभाष चन्द जैन के सान्निध्य में मुख्य संयोजक सुरेश ठोलिया तथा संयोजक सूर्य प्रकाश छाबड़ा, अमरचंद दीवान, सुनील चौधरी, मैना बाकलीवाल, मनीष लुहाडिया, राजेंद्र जैन, जिनेंद्र जैन के कुशल नेतृत्व में संचालित इस यात्रा में धर्म, भक्ति, संस्कार और पारिवारिक एकता का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। इस धार्मिक यात्रा की विशेषता यह है कि इसमें 3 वर्ष के बच्चों से लेकर 83 वर्ष तक के वरिष्ठ श्रद्धालु शामिल हुए हैं। छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी में तीर्थराज के दर्शन एवं वंदना को लेकर विशेष उत्साह दिखाई दे रहा है। यात्रा में एक प्रेरणादायक दृश्य तब देखने को मिला जब तीन पीढ़ियां एक साथ धर्म आराधना में सहभागी बनीं। उभरती हुई शतरंज खिलाड़ी वाणी जैन अपने दादा-दादी एवं माता-पिता के साथ इस पावन यात्रा में शामिल हुई हैं। वाणी जैन ने बताया कि सम्मेद शिखर जी की वंदना एवं तीर्थ दर्शनों गुरुओं के आशीर्वाद से उन्हें आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त हुई है तथा वे अपने उज्ज्वल भविष्य और शतरंज जगत में नई उपलब्धियां अर्जित करने की भावना के साथ इस यात्रा में सहभागी बनी हैं। यात्रा की एक विशेष व्यवस्था यह भी है कि जयपुर से ही किचन दल यात्रियों के साथ चल रहा है, जहां सभी श्रद्धालुओं को शुद्ध, ताजा एवं सात्विक जैन भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। यात्रियों को तीर्थ दर्शन के साथ-साथ जैन संस्कृति, सामाजिक मूल्यों एवं नैतिक संस्कारों की भी प्रेरणा दी जा रही है। यात्रा के दौरान सूर्य प्रकाश छाबड़ा द्वारा "मेरा भारत महान" हाऊजी के माध्यम से देशभक्ति एवं मनोरंजन का संदेश दिया जा रहा है, वहीं अंशुल जैन जैन भजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं में भक्ति एवं राष्ट्रप्रेम की भावना जागृत कर रहे हैं। विशेष रूप से शतरंज खिलाड़ी वाणी जैन बच्चों एवं युवाओं को शतरंज के गुर सिखाने के साथ-साथ शतरंज के माध्यम से जीवन में धैर्य, अनुशासन, निर्णय क्षमता और सकारात्मक सोच विकसित करने की प्रेरणा भी दे रही हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि यह यात्रा केवल तीर्थ दर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार, संस्कार, समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना को मजबूत करने का एक सशक्त माध्यम बन रही है। तीन पीढ़ियों का एक साथ यात्रा में सम्मिलित होना नई पीढ़ी को धार्मिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का प्रेरणादायी संदेश दे रहा है।
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