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राजस्थान: भीलवाड़ा में वैष्णव परिवार के 7 सदस्यों ने लिया अंगदान का संकल्प, पेश की मिसाल
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संक्षेप
राजस्थान: भीलवाड़ा जिले की।खामोर के वैष्णव परिवार के सात सदस्यों ने लिया अंगदान का संकल्प, मानव सेवा की अनूठी मिसाल पेश की भीलवाड़ा जिले के फूलियाकलां इंसान जीवनभर अपने प
विस्तार
राजस्थान: भीलवाड़ा जिले की।खामोर के वैष्णव परिवार के सात सदस्यों ने लिया अंगदान का संकल्प, मानव सेवा की अनूठी मिसाल पेश की भीलवाड़ा जिले के फूलियाकलां इंसान जीवनभर अपने परिवार और समाज के लिए कुछ न कुछ करता है, लेकिन मृत्यु के बाद भी किसी अनजान व्यक्ति के जीवन में उम्मीद बनकर जीवित रहने का फैसला विरले ही लोग कर पाते हैं। खामोर गांव के वैष्णव समाज के एक परिवार ने ऐसा ही प्रेरणादायक कदम उठाते हुए मानव सेवा की अनूठी मिसाल पेश की है। परिवार के सात सदस्यों ने मृत्यु के बाद अंगदान का संकल्प लेकर समाज को संवेदनशीलता और जागरूकता का संदेश दिया है। खामोर निवासी कारसेवक एवं आयुर्वेद विभाग से सेवानिवृत्त कर्मचारी मुरली मनोहर वैष्णव के परिवार के सदस्यों ने अंगदान का संकल्प लिया। स्वास्थ्य विभाग में एएनएम के पद पर कार्यरत परिवार की बहू पूजा देवी वैष्णव की प्रेरणा से उनके जेठ सुभाष चंद्र वैष्णव, उनकी पत्नी अनीता देवी वैष्णव, देवरानी सरिता देवी, उनके पति दुर्गालाल वैष्णव, स्वयं पूजा देवी व उनके पति शिव कुमार वैष्णव ने अंगदान का संकल्प लेकर प्रमाणपत्र प्राप्त किया। प्रमाणपत्रों में विशेष रूप से कॉर्निया यानी नेत्रदान की सहमति दर्ज है।
वहीं परिवार के सदस्य एवं पत्रकार किशन वैष्णव ने मृत्यु के बाद हार्ट समेत उपयोगी अंगों का दान करने की इच्छा जताई है। उनका कहना है कि अंगदान केवल जागरूकता का विषय नहीं, बल्कि स्वयं आगे बढ़कर उदाहरण प्रस्तुत करने का भी अवसर है। पूजा की प्रेरणा बनी आधार। परिवार की इस पहल को आगे बढ़ाने में एएनएम पूजा वैष्णव की महत्वपूर्ण भूमिका रही। स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी होने के कारण उन्होंने अंगदान के महत्व को समझते हुए परिवार के अन्य सदस्यों को भी इसके लिए प्रेरित किया। देखते ही देखते एक सदस्य का संकल्प पूरे परिवार की साझा सोच बन गया। परिवार का मानना है कि मृत्यु के बाद शरीर पंचतत्व में विलीन हो जाता है, लेकिन यदि शरीर का कोई अंग किसी जरूरतमंद के जीवन में रोशनी या नई उम्मीद ला सके तो इससे बड़ी मानव सेवा और क्या हो सकती है। सात सदस्यों का यह सामूहिक संकल्प ग्रामीण क्षेत्र में अंगदान को लेकर जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश है। परिवार ने साबित किया है कि जीवन समाप्त होने के बाद भी इंसान की सेवा भावना जीवित रह सकती है।
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