-
☰
No image found.
उत्तर प्रदेश: पासपोर्ट सत्यापन, चरित्र प्रमाण पत्र और न्यायालयी कार्यों में देरी से आम नागरिक परेशान
- Photo by : social media
संक्षेप
उत्तर प्रदेश: जनपद में पुलिस व्यवस्था को पारदर्शी और जनहितैषी बनाने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्य के नेतृत्व में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। अपराध नियंत्रण से लेकर फरियादियों की सुनवाई तक पुलिस की कार्यशैली में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: जनपद में पुलिस व्यवस्था को पारदर्शी और जनहितैषी बनाने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्य के नेतृत्व में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। अपराध नियंत्रण से लेकर फरियादियों की सुनवाई तक पुलिस की कार्यशैली में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। थाना प्रभारी और विवेचक स्तर तक जवाबदेही भी बढ़ी है, लेकिन इसके बावजूद थानों में तैनात कुछ डाक मुंशी और कोर्ट पैरोकार आम जनता के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। शहर के विभिन्न थानों से लगातार ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं कि पासपोर्ट सत्यापन, चरित्र प्रमाण पत्र, नौकरी से जुड़े पुलिस वेरिफिकेशन और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की प्रक्रिया में आवेदकों को अनावश्यक रूप से दौड़ाया जाता है। कई मामलों में छोटी-छोटी आपत्तियों के नाम पर फाइलों को लंबे समय तक लंबित रखा जाता है, जिससे युवाओं को नौकरी, शिक्षा और अन्य महत्वपूर्ण अवसरों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कुछ आवेदकों का आरोप है कि चरित्र प्रमाण पत्र और पासपोर्ट सत्यापन जैसी प्रक्रियाओं में समय पर रिपोर्ट आगे नहीं भेजी जाती। परिणामस्वरूप लोगों को बार-बार थाने के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इतना ही नहीं, न्यायालय से जारी समन और नोटिस की तामील कराने के लिए आने वाले पैरोकारों को भी कई बार अनावश्यक देरी और असहयोग का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ स्थानों पर समन और नोटिस की तामील को लेकर भी अलग-अलग प्रकार की मांगें की जाती हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इस प्रकार की चर्चाएं पुलिस विभाग की छवि को प्रभावित कर रही हैं। आम नागरिकों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति का कार्य नियमानुसार और समयबद्ध तरीके से हो जाए तो उसे किसी सिफारिश या अतिरिक्त प्रयास की आवश्यकता नहीं पड़े।
जानकारों का मानना है कि वर्तमान समय में थाना प्रभारी, चौकी प्रभारी और अधिकांश पुलिस अधिकारी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में बेहतर कार्य कर रहे हैं, लेकिन थानों में वर्षों से जमे कुछ लिपिकीय कर्मचारी, डाक मुंशी और पैरोकार व्यवस्था की कमजोर कड़ी बने हुए हैं। इनके व्यवहार और कार्यप्रणाली का सीधा प्रभाव जनता की पुलिस के प्रति धारणा पर पड़ता है। जनता की मांग है कि जिस प्रकार पुलिस प्रशासन ने अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है, उसी प्रकार थानों में लंबित सत्यापन, चरित्र प्रमाण पत्र, पासपोर्ट रिपोर्ट और न्यायालयी पत्रावली के निस्तारण की भी नियमित समीक्षा की जाए। साथ ही डाक मुंशियों और कोर्ट पैरोकारों की कार्यप्रणाली का समय-समय पर मूल्यांकन कर जवाबदेही तय की जाए। पुलिस और जनता के बीच विश्वास को मजबूत करने के लिए आवश्यक है कि थाने का प्रत्येक कर्मचारी संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ कार्य करे। यदि सबसे निचले स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों की जवाबदेही सुनिश्चित हो जाए तो पुलिस की जनहितैषी छवि और अधिक मजबूत हो सकती है।
मध्य प्रदेश: गंगा दशहरा पर चंबल में उमड़ा आस्था का सैलाब, श्रद्धालुओं ने लगाई पुण्य की डुबकी
उत्तर प्रदेश: नेहा नर्सिंग होम का ऑपरेशन थियेटर सील, एक्सपायरी इंजेक्शन मिलने से मचा हड़कंप
मध्य प्रदेश: थड़ोद में अधूरा नाला बना ग्रामीणों की परेशानी का कारण, 20 दिन से निर्माण कार्य बंद
