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उत्तर प्रदेश: मोदीनगर की काजल तेवतिया ने बढ़ाया मान, मिसेजयूनिवर्सल इंडिया अवॉर्ड्स 2026 में बनीं सेकंड रनर-अप

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उत्तर प्रदेश  Published by: Naveen Kumar , उत्तर प्रदेश  Edited By: Kunal Tewatia, Date: 09/10/2026 10:58:43 am Share:
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  • Edited By.: Kunal Tewatia,
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  • 09/10/2026 10:58:43 am
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: मुज़फ्फरनगर के एक छोटे से गांव से शुरू हुआ एक बेटी का सफर आज बड़े मंच की रोशनी तक पहुंच चुका है। संघर्ष, जिम्मेदारियों और चुनौतियों के बीच अपने सपनों को जीवित रखते हुए *काजल तेवतिया*

विस्तार

उत्तर प्रदेश: मुज़फ्फरनगर के एक छोटे से गांव से शुरू हुआ एक बेटी का सफर आज बड़े मंच की रोशनी तक पहुंच चुका है। संघर्ष, जिम्मेदारियों और चुनौतियों के बीच अपने सपनों को जीवित रखते हुए *काजल तेवतिया* ने मिसेज यूनिवर्सल इंडिया अवॉर्ड्स 2026 में *सेकंड रनर-अप* का खिताब हासिल कर उत्तर प्रदेश के साथ-साथ मोदीनगर क्षेत्र का नाम भी गौरवान्वित किया है। काजल तेवतिया का यह सफर केवल एक सौंदर्य प्रतियोगिता तक पहुंचने की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस महिला की कहानी है जिसने *गांव की बेटी से लेकर एक परिवार की बहू और मां बनने तक की जिम्मेदारियों को निभाते हुए अपने सपनों को भी उड़ान दी। मुज़फ्फरनगर के एक छोटे से गांव में पली-बढ़ी काजल आज हापुड़ के *बंदोले गांव की बहू* हैं। विवाह और मातृत्व के बाद जीवन की जिम्मेदारियां बढ़ीं, लेकिन काजल ने अपने सपनों को पीछे नहीं छोड़ा। परिवार और समाज की जिम्मेदारियों के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना उनके लिए आसान नहीं था। कई कठिन परिस्थितियों और संघर्षों के बावजूद उन्होंने आत्मविश्वास बनाए रखा और मॉडलिंग एवं पेजेंट की दुनिया में अपनी पहचान बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया।

काजल ने मिसेज यूनिवर्सल इंडिया अवॉर्ड्स 2026 में *उत्तर प्रदेश की ओर से प्रतिनिधित्व करते हुए सेकंड रनर-अप* का स्थान हासिल किया। उनकी इस उपलब्धि ने उनके परिवार और परिचितों के साथ-साथ मोदीनगर क्षेत्र में भी खुशी और गर्व का माहौल बनाया है। काजल का कहना है कि उनके लिए यह उपलब्धि केवल एक अवॉर्ड नहीं, बल्कि उन सभी महिलाओं के लिए एक संदेश है जो शादी और परिवार की जिम्मेदारियों के बाद अपने सपनों को अधूरा छोड़ देती हैं। उनका मानना है कि *जिम्मेदारियां सपनों का अंत नहीं होतीं, बल्कि सही हौसले और मेहनत के साथ वही जिम्मेदारियां सफलता की सबसे बड़ी ताकत बन सकती हैं। एक गांव की साधारण लड़की से लेकर मंच की जगमगाती रोशनी तक का यह सफर काजल के लिए संघर्षपूर्ण जरूर रहा, लेकिन उनकी मेहनत, आत्मविश्वास और लगातार आगे बढ़ने की चाह ने उन्हें आज एक नई पहचान दी है।

काजल तेवतिया की कहानी उन तमाम महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो अपने परिवार को संभालते हुए अपने सपनों को भी पूरा करना चाहती हैं—क्योंकि सपनों की कोई उम्र नहीं होती और उड़ान भरने के लिए सिर्फ हौसले की जरूरत होती है।