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Basant Panchami Update: बसंत पंचमी पूजा का महत्व और जाने क्यों मनाई जाती है बसंत पंचमी
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संक्षेप
दिल्ली: भारत में ऋतुओं और त्योहारों का बहुत विशेष महत्व है।
विस्तार
दिल्ली: भारत में ऋतुओं और त्योहारों का बहुत विशेष महत्व है। इन त्योहारों के माध्यम से लोग न केवल अपने जीवन में खुशियाँ लाते हैं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को भी बनाए रखते हैं। इनमें से एक प्रमुख त्योहार है। बसंत पंचमी, जिसे विशेष रूप से सरस्वती पूजा के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व हर साल के माघ मास की पंचमी तिथि को मनाया जाता है, जो जनवरी–फरवरी के महीने में आता है। बसंत पंचमी का संबंध मुख्य रूप से माता सरस्वती से है, जो ज्ञान, विद्या, संगीत और कला की देवी मानी जाती हैं। मान्यता है कि इस दिन माँ सरस्वती का जन्म हुआ था। इसलिए विद्यार्थियों, शिक्षक, संगीतज्ञ और कलाकार विशेष रूप से इस दिन पूजा-अर्चना करते हैं। लोग देवी सरस्वती की पूजा करके अपने जीवन में ज्ञान, बुद्धि और कला की वृद्धि की कामना करते हैं। बसंत पंचमी का त्योहार केवल धार्मिक दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि ऋतु परिवर्तन के कारण भी महत्वपूर्ण है। इस दिन बसंत ऋतु का आगमन माना जाता है। बसंत ऋतु में हवा सुहानी और वातावरण हल्का-मधुर हो जाता है। खेतों में सरसों के पीले फूल खिलने लगते हैं, और पूरा माहौल रंग-बिरंगा और खुशहाल दिखाई देता है। इसलिए इसे प्रकृति के उत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। पीले कपड़े पहनने का महत्व बसंत पंचमी के दिन लोगों का प्रचलित रिवाज है कि वे पीले रंग के कपड़े पहनते हैं। इसके पीछे कई धार्मिक और सांस्कृतिक कारण हैं। सबसे पहला कारण यह है कि पीला रंग बसंत ऋतु और सरसों के फूलों का प्रतीक है। पीला रंग ऊर्जा, उत्साह, समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। यह रंग मन और मस्तिष्क को सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। धार्मिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो पीला रंग देवी सरस्वती के वस्त्रों का रंग भी है। इसलिए इस दिन पीले कपड़े पहनने से उनकी कृपा प्राप्त होती है। लोग पीले पकवान जैसे हलवा, केसरिया दूध और मिठाइयाँ भी बनाकर देवी को भोग अर्पित करते हैं। इस दिन विद्यार्थी अपनी किताबों पर हल्दी का टीका लगाते हैं और उन्हें मां सरस्वती की पूजा के बाद पढ़ाई के लिए शुभ मानते हैं।
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