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Conversion: स्कूल में नाबालिकों का कराया जा रहा धर्मांतरण, बजरंग दल और RSS ने जमकर किया हंगामा
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संक्षेप
दिल्ली: धर्म को लेकर कई बार लोगों के बिच लड़ाई-झगडे होते रहते है, लेकिन स्कूल एक ऐसी जगह है, जहां बच्चों को शिक्षा दी जाती है न की बच्चों को अपने धर्म के लिए उकसाया जाता है।
विस्तार
दिल्ली: धर्म को लेकर कई बार लोगों के बिच लड़ाई-झगडे होते रहते है, लेकिन स्कूल एक ऐसी जगह है, जहां बच्चों को शिक्षा दी जाती है न की बच्चों को अपने धर्म के लिए उकसाया जाता है। दिल्ली के बुराड़ी से एक ऐसी ही खबर सामने आ रही है, जहां हिंदू बच्चों को उनके धर्म के लिए उकसाया जा रहा था, बच्चों का ब्रैनवॉश किया जा रहा था, जी हां बुराड़ी के संत नगर में स्थित माउंट ओलिवेट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में बच्चों को उनका धर्म परिवर्तन करवाया जा रहा है। बच्चों से ईसाई धर्म को अपनाने के लिए कहां गया है। स्कूल में अगर बच्चा नावेल या अमिन जैसे शब्दो का उपयोग नहीं करता तो बच्चे को बेरहमी से पीटा जाता है। वहीं स्कूल का सुबह समय 6 बजे खुलने का है और क्लास शुरू होने का समय 8 बजे का है, लेकिन स्कूल के अंदर बच्चों को दो घटने तक नावेल की किताब पढ़ाई जाती है। लोगों का कहना है की अगर बच्चा कभी नावेल बुक लेकर नहीं जाता है तो बच्चे को खूब पीटा जाता है और उसको धुप में खड़ा कर दिया जाता है। आम तोर पर हर स्कूल में प्रेयर आधे घंटे की होती है, लेकिन इस स्कूल में बच्चों से दो घटने तक प्रेयर करवाई जाती है। इस स्कूल में बच्चों को हिन्दू धर्म के खिलाफ किया जा रहा है। स्कूल के अंदर बच्चों को टिका लगाना या हाथ पर कलावा बांधने से सख्त मना किया जाता है। स्कूल में लोग बच्चों को पढ़ने के लिए भेजते है। लेकिन स्कूल के अंदर धर्म परिवर्तन करवाया जा रहा है। माउंट ओलिवेट सीनियर सेकेंडरी स्कूल से ये मामला पहले भी सामने आया था, लेकिन तब इस मामले को इतना उजागर नहीं किया था। लेकिन हाल ही में फिर से स्कूल के अंदर बच्चों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए कहां जा रहा है। यह मुद्दा न केवल धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ा है, बल्कि बच्चों के मानसिक, सांस्कृतिक और नैतिक विकास से भी सीधा संबंध रखता है। इस विषय पर विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा का उद्देश्य बच्चों को ज्ञान, विज्ञान से जोड़ना होना चाहिए न कि किसी विशेष धार्मिक विचारधारा को उन पर थोपना चाहिए। सरकार और प्रशासन की भूमिका भी इस मामले में अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्कूलों की गतिविधियों पर नियमित निगरानी, शिकायतों की निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई आवश्यक है।
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