Contact for Advertisement 9650503773


बिहार: बिहार में सत्ता का अपहरण नीतीश कुमार की राजनीति पर मुस्तक़ीम सिद्दीकी का लेख

- Photo by : social media

बिहार  Published by: Sajid Hossain , Date: 05/03/2026 03:41:11 pm Share:
  • बिहार
  • Published by: Sajid Hossain ,
  • Date:
  • 05/03/2026 03:41:11 pm
Share:

संक्षेप

बिहार: एक समय था जब बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार नाम सुनते ही आशा की किरण जाग उठती थी। सामाजिक न्याय का झंडाबरदार, लालू यादव के परिवारवाद को चुनौती देने वाला योद्धा, और गरीब शोषित की आवाज़। व

विस्तार

बिहार: एक समय था जब बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार नाम सुनते ही आशा की किरण जाग उठती थी। सामाजिक न्याय का झंडाबरदार, लालू यादव के परिवारवाद को चुनौती देने वाला योद्धा, और गरीब शोषित की आवाज़। वह व्यक्ति जो बिहार को सुशासन का नया अर्थ सिखा रहा था, आज उसी बिहार की सत्ता से विदाई ले रहा है, न केवल पद से, बल्कि जनमानस की उम्मीदों से भी। यह दुखद है कि जो नेता कभी देश की सत्ता का संभावित चेहरा माना जाता था, वह आज अपने ही फैसलों के बोझ तले दबा दिखाई देता है। इंडिया गठबंधन के साथ छल, बार बार गठबंधन बदलने की राजनीति, और अंत में परिवारवाद की उसी जंजीर में फंस जाना, जिसकी वह आलोचना करता आया था। बीमारी के बावजूद सत्ता का लोभ छोड़ न पाना, और संतान के प्रति प्रेम में डूबकर राजनीतिक उत्तराधिकार की राह चुन लेना। यह सब मिलकर एक महान व्यक्तित्व की त्रासदी बन गया है।

नीतीश कुमार ने बिहार को विकास की नई राह दिखाई थी। सड़कें, बिजली, शिक्षा, ये सब उनके नाम से जुड़े थे। लेकिन सत्ता की लालसा ने उन्हें वही बना दिया जिसके खिलाफ उन्होंने जीवनभर संघर्ष किया। सामाजिक न्याय का हीरो अब विलेन की छवि में तब्दील हो चुका है। फासीवादी और जनविरोधी ताकतों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने का फैसला, नफरत की राजनीति को बल देना, ये सब उनके अंतिम अध्याय में काले धब्बे की तरह उभर आए हैं। आज बिहार एक बीमार, थके हुए मुख्यमंत्री से मुक्ति पा रहा है, लेकिन साथ ही एक उम्मीद भी खो रहा है। नीतीश कुमार अजर अमर हो सकते थे। एक ऐसा नेता जो इतिहास में सम्मान से याद किया जाता। लेकिन उन्होंने खुद को इतिहास के पन्नों में एक सवाल बनाकर छोड़ दिया। सत्ता के लिए आदर्श कितना त्याग सकते हैं? अलविदा, नीतीश कुमार जी। आपकी विरासत में विकास के निशान हैं, लेकिन साथ ही चेतावनी भी की सत्ता का मोह कितना खतरनाक हो सकता है। बिहार अब नए सिरे से अपनी राह तलाशेगा। उम्मीद है, अगला अध्याय बेहतर होगा। आप को जनता ने चुना था आप ने फासीवादी और जनविरोधी ताकतों को चुना।