Contact for Advertisement 9650503773


महाराष्ट्र: जमीन विवाद में गरीब किसानों से अन्याय का आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग

- Photo by : social media

महाराष्ट्र  Published by: Prashant Vasudev Kodkeh , महाराष्ट्र  Edited By: Yashoda, Date: 03/10/2026 12:48:22 pm Share:
  • महाराष्ट्र
  • Published by.: Prashant Vasudev Kodkeh ,
  • Edited By.: Yashoda,
  • Date:
  • 03/10/2026 12:48:22 pm
Share:

संक्षेप

महाराष्ट्र: जमीन और पारिवारिक संपत्ति विवाद से जुड़े मामले में गरीब किसानों के साथ कथित रूप से अन्याय किए जाने का मामला सामने आया है। संबंधित पक्ष की ओर से आरोप लगाया गया है कि पुलिस प्रशासन और कस्टम विभाग की मदद से अवैध गतिविधियों के खिलाफ न्यायालय के आदेश के अनुपालन में बाधा डालने की कोशिश की जा रही है।

विस्तार

महाराष्ट्र: जमीन और पारिवारिक संपत्ति विवाद से जुड़े मामले में गरीब किसानों के साथ कथित रूप से अन्याय किए जाने का मामला सामने आया है। संबंधित पक्ष की ओर से आरोप लगाया गया है कि पुलिस प्रशासन और कस्टम विभाग की मदद से अवैध गतिविधियों के खिलाफ न्यायालय के आदेश के अनुपालन में बाधा डालने की कोशिश की जा रही है।

बताया गया कि विवाद कल्याण क्षेत्र की जमीन, सिविल कोर्ट में चल रहे मामले और वतनी पत्र से जुड़े पारिवारिक संपत्ति विवाद से संबंधित है। मामले में पूर्व सरपंच ज्ञानेश्वर बलिराम ठाकरे, कमलाकर ठाकरे, नारायण ठाकरे और वासुदेव ठाकरे सहित उनके अन्य भाइयों के नाम भी सामने आए हैं।

आरोप है कि जमीन की पैमाइश (मोजनी) की प्रक्रिया में शामिल किसानों और सह-हिस्सेदारों के अलावा अन्य किसानों पर भी कार्रवाई का दबाव बनाया जा रहा है। संबंधित पक्ष का कहना है कि गरीब किसानों को उनकी जमीन और अधिकारों से जुड़े मामलों में दबाव में लेने तथा उनके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की जा रही है।

मामले को लेकर आरोप लगाने वाले पक्ष ने प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जमीन से जुड़े दस्तावेजों, न्यायालय के आदेशों और पैमाइश की प्रक्रिया की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

उन्होंने यह भी मांग की कि जिन किसानों के भूमि अधिकार प्रभावित हो रहे हैं, उन्हें अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिया जाए और किसी भी प्रकार की जबरदस्ती या दबाव की कार्रवाई से बचा जाए।

फिलहाल, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। जमीन विवाद से जुड़े न्यायालयीन रिकॉर्ड और संबंधित विभागों की कार्रवाई के आधार पर ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। प्रशासन या मामले में नामित अन्य पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।