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उत्तर प्रदेश: बीएचयू की ज्योतिष ओपीडी हुई स्पेशलाइज्ड, 100 रुपये में मुहूर्त और 250 में कुंडली परामर्श
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: वाराणसी काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में ज्योतिष परामर्श को अब अलग-अलग विषयों के आधार पर स्पेशलाइज्ड किया गया है।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: वाराणसी काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में ज्योतिष परामर्श को अब अलग-अलग विषयों के आधार पर स्पेशलाइज्ड किया गया है। संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के ज्योतिष विभाग स्थित पंचांग यूनिट में संचालित ज्योतिष एवं कर्मकांड परामर्श केंद्र में लोगों को उनकी जरूरत के अनुसार विशेषज्ञों से सलाह दी जा रही है। नई व्यवस्था के तहत विवाह मिलान, मुहूर्त, जन्म कुंडली, वास्तु, रत्न धारण, मिट्टी संशोधन, मानचित्र संशोधन और कर्मकांड से जुड़े मामलों के लिए अलग-अलग परामर्श की व्यवस्था की गई है। मुहूर्त के लिए 100 रुपये, जबकि जन्म कुंडली, वर्ष कुंडली, प्रश्न कुंडली, रत्न धारण और कर्मकांड संबंधी परामर्श के लिए 250 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। वास्तु संबंधी परामर्श में मिट्टी संशोधन के लिए 500 रुपये और मानचित्र संशोधन के लिए 1000 रुपये शुल्क लिया जाएगा। बीएचयू में ज्योतिष परामर्श केंद्र की ओपीडी सप्ताह में छह दिन शाम 4 से 5 बजे तक संचालित होती है। यहां रोजाना करीब 10 से 15 लोग परामर्श के लिए पहुंच रहे हैं। विभाग की ओर से सात ज्योतिषाचार्यों का साप्ताहिक शेड्यूल भी जारी किया गया है। शेड्यूल के मुताबिक सोमवार को प्रो. गिरजाशंकर, मंगलवार को प्रो. विनय कुमार पांडेय और डॉ. रामेश्वर शर्मा, बुधवार को प्रो. रामजीवन मिश्र, गुरुवार को प्रो. शत्रुघ्न त्रिपाठी और डॉ. रामेश्वर शर्मा, शुक्रवार को प्रो. सुभाष पांडेय और शनिवार को डॉ. सुशील कुमार गुप्ता परामर्श देंगे। विभागाध्यक्ष प्रो. शत्रुघ्न त्रिपाठी के अनुसार, परामर्श को अलग-अलग विषयों में बांटने का उद्देश्य यह है कि लोग जिस समस्या को लेकर आएं, उन्हें उसी विषय के विशेषज्ञ से सलाह मिल सके। विभाग की ओर से उपाय और सुझाव के साथ रिपोर्ट भी तैयार की जाती है। फॉलोअप के लिए दोबारा शुल्क का प्रावधान है, हालांकि एक महीने के भीतर दोबारा आने पर शुल्क नहीं लेने की बात कही गई है। परामर्श केंद्र के समन्वयक प्रो. विनय कुमार पांडेय पिछले चार वर्षों से इसकी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। दी गई जानकारी के मुताबिक, प्रोफेसर ज्योतिषाचार्य को जिले के बाहर ले जाने पर 21 हजार रुपये और जिले के भीतर 11 हजार रुपये शुल्क निर्धारित है। इसके अलावा 50 प्रतिशत दक्षिणा और वाहन का खर्च अलग से देना होगा। नई व्यवस्था के तहत कुंडली, मुहूर्त, वास्तु और कर्मकांड से जुड़ी सेवाओं को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर परामर्श देने की व्यवस्था की गई है।
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