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ओडिशा: डेलांग में चार दिवसीय दोल महोत्सव और सांस्कृतिक जुलूस हुआ सम्पन्न
- Photo by : social media
संक्षेप
ओडिशा: पुरी जिला अंतर्गत डेलांग में प्रतिवर्षानुसार फाल्गुन मास की सांस्कृतिक दोल महोत्सव मनाया गया।
विस्तार
ओडिशा: पुरी जिला अंतर्गत डेलांग में प्रतिवर्षानुसार फाल्गुन मास की सांस्कृतिक दोल महोत्सव मनाया गया। दोलपूर्णमी के अवसर पर सभी गांव में भगवान की प्रतिमाएं झुला झुले। इस साल पूर्णमी के दिन चंद्रग्रहण हुआ था। इस वजह सुवह छह वजे मंदिर में पूजापाठ हुआ था ।शाम के 6.47 वजे सर्वमोक्ष के वाद फिर से विशेष नीतिकांति हुआ। इसके उपरांत दोलवेदी पर विमान में ठाकुर विजे हुए। भोग चढाया गया और ठाकुर झुला झुले ।दोल महोत्सवकी आकर्षक उत्सव के तहत चार दिवसीय पंचुदोल मेला 4 मार्च को आयोजित हुआ । होली त्योहार के रात ही आसपड़ोस की गांव से देवविग्रहों के विमान सजधजकर जुलूस में निकले। इससे पहले मेला मैदान व दोलवेदी की सफाई और पूजापाठ हुई थी। दोल महोत्सव की शुरुआत में मंदिर पर नीतिकांति के वाद घंटघंटा,गाजेवाजे और हरिध्वनि के वीच देर रात को पीठाधीश्वर श्रीनीलकंठेश्वर सुशोभित विमान में विराजमान होकर जुलूस में निकले। श्रीनीलकंठेश्वर देव के निकलते ही अन्य गांव की आराध्य देव के विमान भी निकले। जुलूस में गाजेवाजे के साथ घोडानाच,नागा नृत्य,देवदासी नृत्य,अघोरी नृत्य,गोरिल्ला,भूत और किन्नरों की नृत्य के साथ श्रीजगन्नाथ के चतुर्धाविग्रह और बृषभ की झांकी सामिल रहा। दुल दुल वाजा,सिंग वाजा और ढोल नगारे की ध्वनि से गगन प्रकंपित हुआ। पिछले तीन सालों से ध्वनि प्रदूषण को दृष्टि में रखते हुए डिजे को जुलूस से वाहर किया गया है । इस वार भी जुलूस में डिजे सामिल नहीं हुआ । फिर भी जयकार, ढोल नगारे और संगीत पर नौजवान लडकें थिरकते रहे। मेला महोत्सव में डेलांग यानी पांच गांव जैसे कि रामचंद्रपुर,हाट डेलांग,गुंडुचिपाटणा, पुराना डेलांग और गोलासाहि की हिस्सेदारी रहते हुए भी वोलकणा, जगदलपुर,अमालंग, वडाआंकुला और अलऊता गांव से जुलूस में होकर विमान मेला मैदान पर पहुंचे । सुवह होने तक जुलूस में नाच गाना चलता रहा । दुसरे दिन शाम से मध्य रात्रि तक और कुछ गांव से विमान जुलूस के साथ मैदान पर विराजमान हुए । आखिर तक चालीस विमान मेला मैदान पर विराजमान हुए। इस दौरान गुरुवार और शुक्रवार रात को सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत हुआ। इसमें श्रीनीलकंठेश्वर ड्रामेटिक क्लब द्वारा आयोजित नाटक सहित भुवनेश्वर शहीदनगर से आये हुए सुर स्नेह मेलोडि ग्रुप की नृत्य-संगीत कार्यक्रम और रामलीला नाटक प्रदर्शन सामिल रहा। इसका आनंद उठाने हेतु हजारों की तादाद में श्रद्धालु मेला मैदान पर उपस्थित रहे। भक्तजन हर विमान के पास जाकर भक्तिभाव से देवविग्रहों को गुलाल अर्पित किए । मैदान की एक ओर चाट,आइसक्रीम,वेलुन,खिलौने और चुडिकंगन आदि विभिन्न प्रकार की दुकानें सजी हुई थी। बच्चों और औरतें वहांपर ज्यादातर खरीदारी करते रहे । महोत्सव की चतुर्थ दिवस 7 मार्च शाम को आतिशबाजी प्रदर्शन का आयोजन हुआ है । इसके वाद मेला मैदान से विमानों की विदाई पर्व होगा । विधि अनुसार एक एक करके सभी विमान पीठाधीश्वर श्रीनीलकंठेश्वर से भेंट कर विदाई का परंपरा निभाएंगे । इस अपूर्व लीला को देखने से पाप क्षय जाता है,भक्तजन का यह विश्वास है । साल में एक वार ही सही सवने एक जगह इकठ्ठे हुए,अपनी अपनी सुख-दुख वांटे और एक साथ विमान पर विराजमान सभी देवविग्रहों को दर्शन किए,एक श्रद्धालु के लिए इससे वडी वात और क्या हो सकता है।
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