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राजस्थान: पंचायती राज व नगर निकाय चुनाव में EWS को 10% आरक्षण की मांग, श्री प्रताप फाउंडेशन ने सौंपा ज्ञापन

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राजस्थान  Published by: Pramod Kumar Bansal , Date: 10/03/2026 10:50:13 am Share:
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  • 10/03/2026 10:50:13 am
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संक्षेप

राजस्थान:  प्रताप फाउण्डेशन के सदस्यों ने पंचायती राज व नगर निकाय चुनाव में ईडब्ल्यूएस वर्ग को 10 प्रतिषत आरक्षण की मांग को लेकर सोमवार को प्रदेष के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के नाम एसडीएम

विस्तार

राजस्थान:  प्रताप फाउण्डेशन के सदस्यों ने पंचायती राज व नगर निकाय चुनाव में ईडब्ल्यूएस वर्ग को 10 प्रतिषत आरक्षण की मांग को लेकर सोमवार को प्रदेष के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के नाम एसडीएम रामावतार मीणा को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया कि भारत के संविधान के 73 वें संशोधन के अनुसार राजस्थान में पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 15 क, ख व ग में क्रमशः एस.सी., एस.टी. एवं ओ.बी.सी. वर्ग को पंचायती राज चुनावों में आरक्षण की व्यवस्था की गई है। भारत सरकार द्वारा संविधान के 103 वें संशोधन के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) हेतु सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में 10 प्रतिषत आरक्षण का प्रावधान किया गया हैं जो राजस्थान राज्य में भी प्रभावी है। पंचायती राज, नगरीय निकाय एवं अन्य स्थानीय शासन निकायों में आर्थिक पिछड़े वर्ग (ईडब्ल्यूएस) की सहभागिता निरंतर कम होती जा रही है। महंगे होते चुनावों में यह वर्ग लगातार राजनीतिक प्रतिनिधित्व से वंचित होता जा रहा है। राजस्थान प्रदेश की कुल 352 पंचायत समितियों में 105 पंचायत समितियां ऐसी हैं जिनमें केवल आर्थिक पिछड़ा वर्ग ही नहीं बल्कि जिस अनारक्षित वर्ग में से आर्थिक पिछड़ा वर्ग चिह्नित किया गया है, उसका प्रतिनिधित्व भी 10 प्रतिशत से कम है।

 कुल 32 पंचायत समितियां ऐसी हैं जिनमें अनारक्षित वर्ग का एक भी पंचायत समिति सदस्य नहीं है। 50 पंचायत समितियां ऐसी हैं जिनमें अनारक्षित वर्ग का केवल एक पंचायत समिति सदस्य हैं। प्रदेश की 33 जिला परिषदों में से 08 जिला परिषदें ऐसी हैं, जिनमें अनारक्षित वर्ग के 10 प्रतिषत से भी कम जिला परिषद सदस्य हैं। डूंगरपुर में शुन्य तो दौसा व करौली में मात्र एक-एक जिला परिषद सदस्य अनारक्षित वर्ग के हैं। इससे यह सिद्ध होता है कि राजस्थान के पंचायती राज एवं अन्य स्थानीय संस्थाओं में अनारक्षित वर्ग के आर्थिक पिछड़े वर्ग का ही नहीं साधन संपन्न वर्ग का भी पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है। सामाजिक न्याय का प्राकृतिक सिद्धांत यह कहता है कि सामाजिक व आर्थिक रूप से पिछड़े व्यक्ति को अन्य लोगों के साथ बराबरी का मौका मिलना चाहिये। आर्थिक रूप से पिछड़े और वर्ग (ईडब्ल्यूएस) का व्यक्ति जिसके 

पास चुनाव लड़ने के बराबरी के साधन संसाधन उपलब्ध नहीं है, उसे राजनीति का प्रवेश कहे जाने वाले इन चुनावों में शामिल होने का अवसर ही नहीं मिल पा रहा है। पंचायती राज व स्थानीय स्वशासन राज्य सूची का विषय है और संविधान प्रदत्त व्यवस्था के तहत इस विषय पर नियम एवं कानून बनाने का अधिकार राज्य सरकार के पास है। राजस्थान में इस वर्ष 2026 में त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के आम चुनाव प्रस्तावित हैं। अतः एस.सी., एस.टी. एवं ओ.बी.सी. के अनुरूप ही पंचायती राज अधिनियम 1994 में संशोधन कर आर्थिक पिछड़ा वर्ग (ईडब्ल्यूएस) को भी पंचायती राज चुनावों में 10 प्रतिषत आरक्षण का प्रावधान किया जावें, ताकि ईडब्ल्यूएस वर्ग के गरीब व्यक्ति को समान अवसर के प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत एवं हमारे संविधान निर्माताओं की भावनाओं के अनुरूप चुनाव लड़ने के समान अवसर प्राप्त हो सके। इस दौरान एड. उदय सिंह तंवर, रमेश सिंह राजावत, रघुवीर गोयल, चन्द्रशेखर शर्मा, अजय सिंह तंवर, पूरण सिंह तंवर, अमित शर्मा, सौरभ शर्मा, राजेश सिंह राजावत, रणजीत बंसल आदि मौजूद रहें।
 


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