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उत्तर प्रदेश: जनगणना-2027 में ओबीसी के अलग विकल्प की मांग, संतकबीरनगर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू
- Photo by : SOCIAL MEDIA
संक्षेप
उत्तर प्रदेश: जनगणना-2027 में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का अलग विकल्प उपलब्ध कराने और जातिवार गणना के लिए मानकीकृत ड्रॉपडाउन सूची लागू करने की मांग को लेकर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा ने आंदोलन शुरू कर दिया है।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: जनगणना-2027 में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का अलग विकल्प उपलब्ध कराने और जातिवार गणना के लिए मानकीकृत ड्रॉपडाउन सूची लागू करने की मांग को लेकर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा ने आंदोलन शुरू कर दिया है। बुधवार, 2 सितंबर को संतकबीरनगर जिले की तीनों तहसीलों में अनिश्चितकालीन क्रमिक धरना-प्रदर्शन शुरू किया गया। मेंहदावल तहसील गेट के पास संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने धरना देकर केंद्र सरकार से ओबीसी की जातिवार गणना के लिए वैज्ञानिक और व्यवस्थित व्यवस्था लागू करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी या सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से भेजा। ज्ञापन में कहा गया कि जनगणना-2027 में जातिवार जनसंख्या की गणना का निर्णय महत्वपूर्ण है, लेकिन ओबीसी के लिए अलग विकल्प नहीं होने और जातियों के नाम दर्ज करने के लिए ओपन कॉलम रखने से आंकड़ों की सटीकता प्रभावित हो सकती है। ड्रॉपडाउन सूची लागू करने की मांग राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा ने मांग की कि ओपन कॉलम के स्थान पर राज्यवार आधिकारिक मास्टर जाति निर्देशिका तैयार की जाए। प्रत्येक जाति को एक विशिष्ट कोड दिया जाए और जनगणना के दौरान उसी कोड आधारित ड्रॉपडाउन सूची के माध्यम से जाति दर्ज करने की व्यवस्था की जाए। संगठन का कहना है कि इससे अलग-अलग नाम, स्थानीय नाम और वर्तनी के कारण होने वाली विसंगतियों को कम किया जा सकेगा। मोर्चा ने एससी-एसटी की तरह ओबीसी के लिए भी अलग विकल्प उपलब्ध कराने और उसी पद्धति से ओबीसी की गणना कराने की मांग रखी है। संगठन ने वर्ष 2011 के जातिगत सर्वे का हवाला देते हुए दावा किया कि उस समय ओपन विकल्प के कारण बड़ी संख्या में अलग-अलग जातीय प्रविष्टियां सामने आई थीं। छह सूत्रीय मांगें रखीं राष्ट्रपति को भेजे ज्ञापन में संगठन ने छह प्रमुख मांगें रखीं। इनमें ओबीसी का अलग विकल्प, राज्यवार आधिकारिक मास्टर जाति निर्देशिका, प्रत्येक जाति को विशिष्ट कोड, ओपन कॉलम की जगह मानकीकृत विकल्प आधारित व्यवस्था, स्थानीय व असूचीबद्ध जातियों के सत्यापन की संस्थागत व्यवस्था और जाति संबंधी आंकड़ों के संग्रह एवं सत्यापन की पारदर्शी तथा सुरक्षित प्रक्रिया शामिल हैं। संगठन के अनुसार आंदोलन का पहला चरण 25 अगस्त को जिला और तहसील मुख्यालयों पर ज्ञापन देने के रूप में हुआ था। दूसरे चरण में 2 सितंबर से अनिश्चितकालीन क्रमिक धरना शुरू किया गया है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जातिवार जनसंख्या के विश्वसनीय आंकड़े नीति निर्माण और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही।
