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उत्तर प्रदेश: स्वतंत्रता सेनानी के बेटे की बदहाल जिंदगी, सरकारी मदद की मांग

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उत्तर प्रदेश  Published by: Arvind Kumar Vishwakarma , उत्तर प्रदेश  Edited By: Shubhi Shikha Nayal, Date: 25/08/2026 10:49:23 am Share:
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  • Published by.: Arvind Kumar Vishwakarma ,
  • Edited By.: Shubhi Shikha Nayal,
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  • 25/08/2026 10:49:23 am
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: गाजीपुर में अंतर्गत फतेउल्लाहपुर ग्राम सभा ने देश की आजादी के लिए अपनी जान न्योछावर करने वाले अमर सेनानी स्वर्गीय रामदेव राम के परिवार की स्थिति आज बेहद दयनीय और कष्टदायक बनी हुई है।

विस्तार

उत्तर प्रदेश: गाजीपुर में अंतर्गत फतेउल्लाहपुर ग्राम सभा ने देश की आजादी के लिए अपनी जान न्योछावर करने वाले अमर सेनानी स्वर्गीय रामदेव राम के परिवार की स्थिति आज बेहद दयनीय और कष्टदायक बनी हुई है। देश को आजाद कराने वाले शहीद के बेटे, जिन्होंने कभी अपने पिता का स्पर्श तक नहीं महसूस किया, आज बुनियादी सरकारी सुविधाओं और स्वास्थ्य देखभाल के अभाव में गुमनामी का जीवन जीने को मजबूर हैं। स्वर्गीय रामदेव राम ने बेहद कम उम्र में देश के लिए अपना बलिदान दे दिया था। उस समय उनकी पत्नी स्वर्गीय गुलजारी देवी गर्भवती थीं। बलिदान के बाद बेटे का जन्म हुआ। जब तक माता गुलजारी देवी जीवित रहीं, उन्हें स्वतंत्रता सेनानी की पेंशन मिली, लेकिन उनके जाने के बाद परिवार की सुध लेने वाला कोई नहीं रहा।

मजदूरी में बीती जवानी, अब गंभीर बीमारियों का साया पिता का साया न होने और तंगहाली के कारण शहीद के बेटे को पूरी जवानी दूसरों के घरों में मजदूरी और मवेशियों का काम करके बितानी पड़ी। आज वे और उनकी पत्नी बेहद दयनीय स्थिति में जीवन यापन कर रहे हैं वे ब्रेन ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं, जिसके इलाज के लिए परिवार के पास आर्थिक साधन नहीं हैं। हालत यह है कि दैनिक शुगर की दवाइयों के लिए भी पैसे जुटाना मुश्किल हो रहा है एक पक्के मकान (प्रधानमंत्री आवास) के बजाय उनके पास केवल एक कच्ची झोपड़ी है, जिससे बारिश में पानी टपकता है। मूलभूत सुविधाओं से वंचित परिवार को वृद्धावस्था पेंशन तक नहीं मिल पा रही है। घर में शौचालय न होने से खुले में शौच जाने की मजबूरी है और उज्ज्वला योजना का गैस कनेक्शन न मिलने के कारण आज भी चूल्हे के धुएं में खाना बनता है। जमीन पर कब्जा आरोप है कि दबंगों द्वारा उनकी पत्रक जमीन पर भी अवैध कब्जा कर लिया गया है।

सहायता से ज्यादा हक और सम्मान की जरूरत

स्थानीय स्तर पर इस परिवार की व्यथा को उजागर करने के लिए एक बोर्ड लगाया गया है ताकि जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को इस उपेक्षा का अहसास हो सके। मुद्दा केवल व्यक्तिगत आर्थिक मदद का नहीं है—बल्कि उस सम्मान और अधिकार का है जिसके यह स्वतंत्रता सेनानी का परिवार हकदार है। जब तक प्रशासन और जिम्मेदार लोग स्वयं आगे आकर इस परिवार को उनका जायज हक, सरकारी योजनाएं और सम्मान नहीं दिलाते, तब तक इसके लिए आवाज उठाई जाती रहेगी। प्रशासन से मांग है कि शहीद परिवार की स्थिति का तत्काल संज्ञान लेकर उन्हें चिकित्सा सुविधा, आवास, पेंशन और उनकी जमीन वापस दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जाए।