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मध्य प्रदेश: वन प्रबंधन में आधुनिक तकनीक से जुड़ेगा एमपी, वनकर्मियों की होगी नई भर्ती

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मध्य प्रदेश  Published by: Ajay Singh Tomar , मध्य प्रदेश  Edited By: Kunal Tewatia, Date: 25/08/2026 12:26:21 pm Share:
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  • Published by.: Ajay Singh Tomar ,
  • Edited By.: Kunal Tewatia,
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  • 25/08/2026 12:26:21 pm
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संक्षेप

मध्य प्रदेश: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल, जंगल, वानस्पतिक संपदा और वन्यप्राणियों की रक्षा करने में वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों का योगदान महत्वपूर्ण है।

विस्तार

मध्य प्रदेश: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल, जंगल, वानस्पतिक संपदा और वन्यप्राणियों की रक्षा करने में वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों का योगदान महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि परमेश्वर ने नैसर्गिक सुंदरता के साथ मध्यप्रदेश को वनों का अनुपम साम्राज्य दिया है। ये वन भारत और दुनियाभर में मध्यप्रदेश की पहचान हैं। हमारे वनकर्मी पूरी लगन से इसकी रक्षा करते हैं। प्रदेश के शासकीय सेवकों को पदोन्नति के फैसले का लाभ वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों को भी मिला है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में सुशासन की सरकार है। सुशासन के लिए हर क्षेत्र में युवाओं की सहभागिता जरूरी है। उन्होंने कहा कि पदोन्नति शासकीय सेवक का उसके काम के प्रति लगन और समर्पण का सम्मान है। वन विभाग के 4 हजार 506 शासकीय सेवकों को पदोन्नत किया गया है। सभी विभागों में कर्मचारियों को मिली पदोन्नति से मन संतोष से भरा है। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वन विभाग के लिए 25 हजार 389 पद स्वीकृत हैं। अभी 18 हजार से अधिक कर्मचारी कार्य कर रहे हैं। हम वन प्रबंधन को अत्याधुनिक तकनीक से जोड़ना चाहते हैं। इसीलिए हमने पदोन्नति के साथ ही खाली हुए पदों को भरने के लिए नई भर्ती के आदेश दे दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को भोपाल स्थित भारतीय वन प्रबंधन संस्थान में वन विभाग में पदोन्नत शासकीय अधिकारियों-कर्मचारियों द्वारा आयोजित आभार एवं अभिनंदन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम के अध्यक्ष श्री रामनिवास रावत भी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन विभाग के मैदानी अधिकारी-कर्मचारियों को ‘प्रकृति पुत्र' और 'ग्रीन सोल्जर्स' की संज्ञा देते हुए कहा कि उनके बीच आकर मन हर्ष से भर गया है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश को भारत जैसे मेगा-बायोडायवर्स देश और समृद्ध जैव-विविधता की विरासत मिली है। वन अमले के पुरुषार्थ से मध्यप्रदेश वन एवं वन्यजीव संरक्षण का रोल मॉडल बना है। 

प्रदेश की पहचान जल, जंगल और जीव से है और वन विभाग ने इनके संरक्षण में मिसाल कायम की है। इसी पुरुषार्थ के कारण मध्यप्रदेश को टाइगर स्टेट, लेपर्ड स्टेट, घड़ियाल स्टेट, गिद्ध स्टेट और अब चीता स्टेट का गौरव मिला है। उन्होंने कहा कि पदोन्नति से वन विभाग में वर्षों के इंतजार का फल मिला है। जिन्हें पदोन्नति मिली है उनमें 188 सहायक वन संरक्षक, 2,821 वनपाल, 761 उप वन क्षेत्रपाल तथा अन्य संवर्ग के 736 अधिकारी-कर्मचारी शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने सभी पदोन्नत अधिकारियों-कर्मचारियों को बधाई देते हुए उनके परिजनों के सहयोग और त्याग के प्रति भी आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज मध्यप्रदेश वन्य जीवों के संरक्षण के मामले में पूरे देश अव्वल है। प्रदेश के जंगलों में अब भैंसें भी वापस आ चुके हैं। मध्यप्रदेश के वन और वन्यजीवों की दुनिया मुरीद है। हमारे वनकर्मी पूरी प्रतिबद्धता के साथ जंगल, पहाड़, वन और नदियों की रक्षा करते हैं। वनकर्मी हमारी वन संपदा की सुरक्षा की मजबूत दीवार की तरह हैं, जो वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ वन क्षेत्र में निवासरत आबादी की भी चिंता करते हैं। 
मनुष्य का जीवन और जंगल एक दूसरे पर निर्भर हैं। हमारा प्रयास है कि जैसा हमने पाया है, उससे और बेहतर हम भावी पीढ़ी को सौंपें। ईश्वर की कृपा से मध्यप्रदेश नदियों का मायका है। कोई ग्लेशियर नहीं होने पर भी हमारी नदियां जलराशि से सदैव समृद्ध रहती हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पास अगली पीढ़ी को सबसे अच्छा तोहफा सौंपने का सौभाग्य है। उन्होंने कहा कि विकास तभी पूर्ण होगा, जब जंगल और जैव-विविधता सुरक्षित रहें, नदियां संरक्षित रहें और भावी पीढ़ियों के लिए पर्यावरण सुरक्षित हो।

प्रमुख सचिव, वन श्री राघवेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव की दृढ़ इच्छाशक्ति के बलबूते अन्य विभागों की तरह वन विभाग में कुल 4 हजार 506 अधिकारी-कर्मचारियों को पदोन्नति दी गई है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की वन सम्पदा और वन्यप्राणियों का संरक्षण मुख्यमंत्री डॉ. यादव की विशेष रुचि का विषय है। मध्यप्रदेश के भौगोलिक क्षेत्र का 30.72 प्रतिशत वनों के आच्छादित है। यहां 9 टाइगर रिजर्व, 26 वाइल्ड लाइफ सेंचुरी मध्यप्रदेश की पहचान हैं। पर्यटन क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश का हृदय क्षेत्र है। इतनी बड़ी संख्या में वन और वन्यप्राणियों की संख्या के आधार पर मध्यप्रदेश लंग्स ऑफ इंडिया भी है। कुछ महीने पहले रातापानी (सर वीएस वाकणकर) और माधव टाइगर रिजर्व, डॉ. भीमराव आम्बेडकर अभारण्य सहित प्रदेश के पहले ताप्ती कंजर्वेशन रिजर्व का गठन हुआ है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के चीता प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने, गज रक्षक (एआई प्रणाली) से हाथियों की निगरानी, पीएम गतिशक्ति परियोजना के लिए वन मानचित्रों का प्रयोग, आधुनिक तकनीक और नवाचार लगातार संचालित हो रहे हैं। एक पेड़ मां के नाम योजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश में इस वर्ष अब तक 5 करोड़ 62 लाख से अधिक पौधे रोपे गए हैं। प्रदेश के 43 जिलों में 94 वन वाटिकाओं की स्वीकृति मिल गई है। प्रदेश में तेंदुपत्ता संग्राहकों को लगातार राशि वितरित की जा रही है। समारोह में पदोन्नत सहायक वन संरक्षक श्री रजनीश शुक्ला ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पदोन्नति के निर्णय से विभाग के हजारों कर्मचारियों में काम के प्रति लगन और मेहनत की एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है। उन्होंने इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। पदोन्नत वनपाल श्री दिनेश नागर, उप वन क्षेत्रपाल श्रीमती सीमा राजगौंड, वनपाल श्रीमती कल्पना गौड़ ने भी रक्षाबंधन से पहले उन्हें पदोन्नति का उपहार देने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार व्यक्त किया। पदोन्नत वनपाल श्री रामदास सोलंकी ने कहा कि उसकी पदोन्नति से उसके समाज, परिवार और 


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