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उत्तर प्रदेश: संतकबीरनगर में एचआईवी-एड्स की रोकथाम और उपचार पर स्वास्थ्य अधिकारियों को दिया गया प्रशिक्षण
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: संतकबीरनगर राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन और एचआईवी संक्रमण की रोकथाम के उद्देश्य से मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के सभागार में जिला स्तरीय प्रशिक्षण-सह-संवेदीकरण कार्यशाला आयोजित की गई।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: संतकबीरनगर राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन और एचआईवी संक्रमण की रोकथाम के उद्देश्य से मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के सभागार में जिला स्तरीय प्रशिक्षण-सह-संवेदीकरण कार्यशाला आयोजित की गई। राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) के निर्देश पर उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी (यूपीएसएसीएस) और पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया (पीएचएफआई) के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारियों को एचआईवी-एड्स की रोकथाम, जांच, उपचार और मरीजों के अधिकारों के संबंध में जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के लक्ष्यों, रणनीतियों और जिला स्तर पर इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा की गई। अधिकारियों को एचआईवी संक्रमण की समय पर पहचान, मरीजों को उपचार से जोड़ने और नियमित निगरानी के महत्व के बारे में बताया गया। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं के विभिन्न स्तरों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया गया। कार्यशाला में एचआईवी और यौन संचारित संक्रमणों (एसटीआई) की स्क्रीनिंग, परामर्श एवं जांच सेवाओं के साथ एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी), वायरल लोड की निगरानी और एचआईवी-टीबी संक्रमण से प्रभावित मरीजों की देखभाल पर प्रशिक्षण दिया गया। मां से बच्चे में एचआईवी और सिफलिस संक्रमण की रोकथाम के उपायों पर भी चर्चा हुई। प्रशिक्षण के दौरान 'यू=यू' यानी 'अनडिटेक्टेबल = अनट्रांसमिटेबल' की अवधारणा समझाई गई। इसके तहत बताया गया कि एआरटी उपचार से एचआईवी से प्रभावित व्यक्ति का वायरल लोड लगातार जांच में पता न चलने योग्य स्तर पर बना रहने पर यौन संपर्क के माध्यम से संक्रमण फैलने का जोखिम नहीं रहता। इसके अलावा लक्षित हस्तक्षेप कार्यक्रमों, उच्च जोखिम वाले समूहों और समुदाय आधारित रोकथाम सेवाओं पर भी जानकारी दी गई। अधिकारियों को एचआईवी एवं एड्स (रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम, 2017 के प्रमुख प्रावधानों से अवगत कराते हुए मरीजों की गोपनीयता बनाए रखने, उनके अधिकारों की रक्षा करने और भेदभाव रोकने के प्रति जागरूक किया गया। कार्यशाला में केस स्टडी, प्रस्तुतीकरण, समूह चर्चा और व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया। अंत में प्रतिभागियों का आकलन कर फीडबैक भी लिया गया। कार्यशाला में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राम अनुज कन्नौजिया, डिप्टी सीएमओ डॉ. वीके सोनी, जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. अमित कुमार सिंह, डिप्टी डीटीओ डॉ. शैलेंद्र कुमार सिंह, एसीएमओ डॉ. राम रतन, डॉ. महेंद्र प्रसाद, डॉ. सोहन गुप्ता, डॉ. राम मौर्य, जिला कार्यक्रम समन्वयक अमित अरोड़ा, एचआईवी-टीबी समन्वयक ईश्वर चंद्र और आईसीटीसी से डॉ. अजीत नाथ तिवारी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। प्रशिक्षण में मास्टर ट्रेनर डॉ. मनीष शर्मा, पीएचएफआई की क्षमता निर्माण विशेषज्ञ किरण मिश्रा, क्षमता निर्माण अधिकारी नीरज श्रीवास्तव और दिशा टीम के सीपीएम अखिलेश ने मार्गदर्शन दिया।
