-
☰
No image found.
उत्तर प्रदेश: चक अजभुजगी में सरकारी जमीन पर कथित अतिक्रमण को लेकर ग्रामीणों ने उठाए सवाल, कार्रवाई की मांग
- Photo by : SOCIAL EDIA
संक्षेप
उत्तर प्रदेश: सरकार भले ही भूमाफियाओं के खिलाफ जीरो टॉलरेंस और बुलडोजर कार्रवाई का दावा कर रही हो, लेकिन तहसील जलालपुर के अंतर्गत विकास खंड भियांव की ग्राम सभा चक अजभुजगी में सरकारी जमीनों पर वर्षों से जारी कब्जों ने इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: सरकार भले ही भूमाफियाओं के खिलाफ जीरो टॉलरेंस और बुलडोजर कार्रवाई का दावा कर रही हो, लेकिन तहसील जलालपुर के अंतर्गत विकास खंड भियांव की ग्राम सभा चक अजभुजगी में सरकारी जमीनों पर वर्षों से जारी कब्जों ने इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि भूमाफियाओं ने तालाब गाटा संख्या 78, बंजर भूमि गाटा संख्या 29 एवं 33 तथा चकमार्ग गाटा संख्या 37 पर अवैध कब्जा कर पक्के निर्माण तक करा लिए हैं। हालत यह है कि गांव का चकमार्ग लगभग बाधित हो चुका है और तालाब की भूमि भी कब्जे की भेंट चढ़ गई है। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिखाई दे रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मामला वर्षों से तहसील और जिला प्रशासन के संज्ञान में है, तब भी कब्जे क्यों बरकरार हैं? यदि कब्जाधारकों को बेदखली नोटिस जारी किए जा चुके हैं, तो नोटिस के बाद कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या सरकारी आदेश सिर्फ कागजों तक सीमित हैं? ग्रामीणों का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार भूमाफियाओं पर बुलडोजर चलाने और सरकारी जमीनों को मुक्त कराने की बात करते हैं, लेकिन चक अजभुजगी में हालात इसके उलट दिखाई दे रहे हैं। यहां सरकारी संपत्तियों पर कब्जा करने वालों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वर्षों बाद भी न कब्जा हटा और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी की जवाबदेही तय हुई। क्षेत्र में चर्चा है कि आखिर ऐसे कौन से कारण हैं जिनकी वजह से कार्रवाई लगातार टलती जा रही है। ग्रामीणों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या प्रशासनिक उदासीनता के चलते भूमाफियाओं को संरक्षण मिल रहा है? यदि नहीं, तो फिर सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने में इतनी देरी क्यों? गांव के लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही तालाब, बंजर भूमि और चकमार्ग को अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया गया, तो वे इस मुद्दे को उच्च अधिकारियों और मुख्यमंत्री तक पहुंचाने के लिए आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। अब जनता पूछ रही है— क्या सरकारी तालाब और चकमार्ग पर कब्जा करने वालों पर बुलडोजर चलेगा? क्या प्रशासन सिर्फ नोटिस देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान चुका है? क्या भूमाफियाओं के सामने शासन-प्रशासन बेबस है, या फिर किसी बड़े संरक्षण का खेल चल रहा है? इन सवालों के जवाब का इंतजार सिर्फ चक अजभुजगी ही नहीं, बल्कि पूरा क्षेत्र कर रहा है।
