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बिहार: बिहार राज्य खेल मजदूर यूनियन की विचार गोष्ठी, खेतिहर मजदूरों के अधिकारों पर दिया जोर

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बिहार  Published by: Dinesh Kumar Gupta , Date: 04/04/2026 02:06:27 pm Share:
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  • 04/04/2026 02:06:27 pm
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संक्षेप

बिहार: नवादा के चर्चित वाम संगठन से जुड़े बिहार राज्य खेल मजदूर यूनियन का एक दिवसीय अहम विचार गोष्ठी आज शुक्रवार को नवादा नगर में स्थित नवादा समाहरणालय के समीप अम्बेडकर पुस्तकालय भवन में आयोजित हुई।

विस्तार

बिहार: नवादा के चर्चित वाम संगठन से जुड़े बिहार राज्य खेल मजदूर यूनियन का एक दिवसीय अहम विचार गोष्ठी आज शुक्रवार को नवादा नगर में स्थित नवादा समाहरणालय के समीप अम्बेडकर पुस्तकालय भवन में आयोजित हुई। इसकी अध्यक्षता का. राजेंद्र प्रसाद वर्मा ने की। विचार गोष्ठी के दरम्यान बिहार राज्य खेत मजदूर यूनियन के सदस्यता अभियान, १६ व १७ मई २६ को प्रस्तावित बिहार राज्य परिषद की बैठक, मनरेगा के नाम बदल कर जी राम जी रखकर इसकी प्रासंगिकता और उपयोगिता समाप्त करने की सुनियोजित साजिश का प्रतिरोध, जिले ७ हजार नए सदस्य बनाने के निर्धारित लक्ष्य सहित सम सामयिक जन हितैषी मुद्दों पर जमकर जोरदार सघन मंथन हुई। विचार गोष्ठी में शामिल वक्ताओं ने खेतिहर मजदूरों की बदस्तुर चली आ रही असहनीय शोषण दोहन की क्रूर सरकारी प्रायोजित नापाक हरकतों और साजिशों का जड़ेमुल से बखिया उधेड़ते स्पष्ट कहा कि डबल ईंजन की केंद्र व राज्य सरकारें खेतिहर मजदूरों के हितों और सुख सुविधाओं का ख्याल रखने की बातें तो दूर रही,उल्टे सरकार प्रदत्त अधिकारों को देने के बजाय काले कानूनों के सहारे खात्मा करने पर उतारू हैं। मनरेगा का नाम बदलना एवं उसके प्रावधानों को जटिल बना कर व्यवहारिक अमलीजामा पहनाना इन्हीं जन विरोधी खतरनाक षडयंत्र का हिस्सा है। उक्त विचार गोष्ठी के प्रधान वक्ता यूनियन के महासचिव का. जानकी पासवान ने अपने वक्तव्य में पूर्व घोषित एजेंडे पर विस्तार पूर्वक सघन चर्चा की। 


मौजूदा दौर में भूमिहीन मजदूरों की खस्ताहाल के लिए खासकर केंद्र व राज्य सरकारें को पूर्णतः जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि तमाम शोषित तथा पीड़ित खेतिहर मजदूरों को संगठित एकजूट संघर्ष की दिशा में दृढ़ता और साहस के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता है। देश में जमीन की कमी नहीं है। यह कैसी विडंबना है कि भूमिहीनों को घर के लिए जमीन उपलब्ध कराने के बजाय देश में कॉर्पोरेट घरानों को कौड़ी के दाम में बेशर्म शासक वर्ग हजारों हजार एकड़ जमीन मुहैय्या करा रही है। उन्होंने स्थानीय तथा सामयिक समस्याओं को भी सरकारी साजिश का ही हिस्सा बताया। यूनियन के सदस्यता अभियान को द्रुत गति से तेज करने का आह्वान किया। उक्त विचार गोष्ठी व बैठक में कृष्णा नगर, हिसुआ, भट्टा जैसे गांवों में घटित दमन, उत्पीड़न,मॉबलींन्चिंग, हत्याएं आगजनी जैसे क्रूर अमानवीय घटनाओं का जिक्र व विरोध करते हुए इस पर पूर्णविराम लगाने के लिए एकता और संघर्ष पर जोर दी गई। विचार गोष्ठी की शुभारम्भ शोक श्रद्धांजलि सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें का. प्रमोद शर्मा, लखीसराय, का. निरंजन कुमार,समस्तीपुर, अखिलेश यादव,पथरा इंग्लिश, सुबोध सिंह,फरहेदा, दशरथ प्रसाद,शक्ति विधा, जगदीश प्रसाद यादव,पुनथर तथा मुनि सिंह,सगमा समेत देश एवं राज्य के तमाम शहीद व दिवंगत साथियों के लिए एक मिनट मौन रहकर शोक श्रद्धांजलि अर्पित की गई। मौके पर अशोक समदर्शी, उमाकांत अधिवक्ता, गोविन्द प्रसाद, राजेन्द्र प्रसाद, राजकुमार प्रसाद, ललन कुमार, सुभाष प्रसाद यादव, नुनु कुमार चौधरी,रामसरेख यादव, विजय नंदन सिंह, बासुदेव महतो तथा अंबिका राम आदि शामिल थे।