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ओडिशा: जरिपुट संकटमोचन हनुमान मंदिर: भक्तों के लिए शांति और संकट निवारण का स्थल
- Photo by : ncr samachar
विस्तार
ओडिशा: राजधानी भुवनेश्वर से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित जरिपुट संकटमोचन हनुमान मंदिर एक ऐसी पवित्र जगह है, जहाँ भक्तों के दिलों में आस्था और विश्वास का केंद्र बन चुका है। यह मंदिर खोर्धा जिले के राष्ट्रीय राजमार्ग 16 से लगभग दो किलोमीटर दूर एक छोटी पहाड़ी की चोटी पर स्थित है, और यहाँ भक्तों की आस्था और उनके संकटों के समाधान के लिए लगातार भीड़ लगी रहती है। मंदिर तक पहुँचने के लिए सड़क मार्ग और रेलमार्ग दोनों ही उपलब्ध हैं। भक्त यहां भगवान हनुमान की कृपा से अपने संकटों से मुक्ति प्राप्त करने के लिए आते हैं। वयोवृद्ध लोग बताते हैं कि भगवान हनुमान बहुत पहले से इस पहाड़ी की चोटी पर स्थित थे, लेकिन उनका अस्तित्व किसी को नहीं पता था। यह जानकारी एक भक्त को हनुमानजी ने स्वयं दी, जिसके बाद लोगों को इस स्थान पर भगवान महावीर के वास का पता चला। मंदिर के निर्माण की शुरुआत 1991 में हुई थी, जब महात्मा मधुसूदन दासजी महाराज ने अपनी निष्ठा और विश्वास के साथ इसे आकार देना शुरू किया। उनके नेतृत्व में मंदिर निर्माण का कार्य संपन्न हुआ और आज यहाँ भगवान हनुमान के साथ भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता की भी पूजा होती है। यह सब संकटमोचन हनुमान की कृपा से ही संभव हुआ। 2007 में मधुसूदन दासजी का महाप्रयाण हुआ, लेकिन उनकी निष्ठा और योगदान हमेशा याद किया जाता है। मंदिर परिसर में एक विशाल वट वृक्ष भी है, जहाँ भक्त अपनी मन्नतें पूरी करने के लिए नारियल चढ़ाते हैं और वट वृक्ष की डाली पर रेशमी धागा बांधते हैं। मंदिर में खास तौर पर मंगलवार, शुक्रवार और संक्रांति के दिन पका हुआ अन्न प्रसाद भक्तों को दिया जाता है। इसके अलावा, विशेष अवसरों पर रामचरितमानस पारायण और महायज्ञ जैसे धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं, जिनमें श्रद्धालु भाग लेते हैं और भगवान के दर्शन करते हैं। जरिपुट संकटमोचन हनुमान मंदिर की विशेषता यह है कि यहां पर निष्काम भाव से प्रार्थना करने से भक्तों के संकट दूर होते हैं और उनके दिल में किए गए संकल्प पूरे होते हैं। यहाँ का प्राकृतिक सौंदर्य भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है, और मंदिर परिसर से दूर-दूर तक फैली हरियाली और शांति का अनुभव किया जा सकता है।
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