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बिहार: सावन के पहले सोमवार और मैना पंचमी पर मां विषहरा स्थान में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

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  Published by: Ishwar Kumar Sah ,   Edited By: Kunal Tewatia, Date: 03/08/2026 08:01:29 pm Share:
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संक्षेप

बिहार: सावन के पहले सोमवार और मैना पंचमी के अवसर पर सहरसा जिले के बसौना और दिवारी गांव स्थित प्रसिद्ध मां विषहरा स्थान में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

विस्तार

बिहार: सावन के पहले सोमवार और मैना पंचमी के अवसर पर सहरसा जिले के बसौना और दिवारी गांव स्थित प्रसिद्ध मां विषहरा स्थान में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इस वर्ष सावन का पहला सोमवार और मैना पंचमी एक ही दिन पड़ने के कारण मंदिर परिसर में सुबह से शाम तक श्रद्धालुओं और नवविवाहितों की बड़ी संख्या में आवाजाही रही। भक्तों ने मां विषहरा की पूजा-अर्चना कर दूध, लावा और बताशे का प्रसाद चढ़ाया। स्थानीय मान्यता के अनुसार, मां विषहरा बसौना गांव की कुलदेवी हैं। कवयित्री चांदनी झा ने मां विषहरा स्थान की मान्यताओं के बारे में बताया कि उनके पूर्वजों के अनुसार मां विषहरा इसी भूमि पर स्वयं प्रकट हुई थीं। बाद में स्वप्न के माध्यम से उनके प्रकट होने की जानकारी मिली, जिसके बाद ग्रामीणों ने यहां मंदिर का निर्माण कराया।

बताया जाता है कि यह स्थान अपनी धार्मिक मान्यताओं के कारण विशेष महत्व रखता है। यहां भगवान शिव की पांच पुत्रियां जया, विषहरा, शामिलबारी, दौतली और देव एक साथ कुंवारी अवस्था में विराजमान मानी जाती हैं। हाल के वर्षों में यहां शिवपुत्री माता मनसा देवी की प्रतिमा भी स्थापित की गई है। मान्यता है कि पहले मंदिर परिसर में एक कुआं था, जहां नाग-नागिन के नृत्य करने की कथाएं प्रचलित थीं। वर्तमान में तालाब को नाग-नागिन देवताओं से जुड़ा पवित्र स्थान माना जाता है। ग्रामीणों के अनुसार, मां विषहरा की कृपा से क्षेत्र में नाग-नागिन से जुड़े किसी दुष्प्रभाव का सामना नहीं करना पड़ता।

बसौना गांव की कुलदेवी होने के कारण मैना पंचमी के दिन गांव के प्रत्येक घर से माता को दूध और लावा चढ़ाने की परंपरा है। दूर-दराज से भी श्रद्धालु यहां पूजा करने पहुंचते हैं। मां को दूध, लावा और बताशे का प्रसाद विशेष रूप से प्रिय माना जाता है। पांचों बहनों को कुंवारी मान्यता प्राप्त होने के कारण यहां उन्हें सिंदूर नहीं लगाया जाता। सावन के दौरान यहां कुंवारी कन्याओं और ब्राह्मणों को खीर भोजन कराने की भी परंपरा है। स्थानीय लोगों की मान्यता है कि इसके बाद क्षेत्र में अच्छी बारिश होती है और खेती को लाभ मिलता है।
मां विषहरा स्थान पर सावन के दौरान प्रत्येक मंगलवार को विशेष मेला लगता है। यह मेला पूरे सावन चलता है और रक्षाबंधन के अवसर पर इसका स्वरूप और भी भव्य हो जाता है। रक्षाबंधन के दो दिन बाद मेले का समापन होता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि मां विषहरा के दरबार में सच्चे मन से की गई प्रार्थना से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।