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उत्तर प्रदेश: 10 साल से पक्के मकान की आस, पन्नी और किराए के सहारे गुजर रही जिंदगी

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उत्तर प्रदेश  Published by: Irshad Ahmad , उत्तर प्रदेश  Edited By: Kunal Tewatia, Date: 24/08/2026 11:09:14 am Share:
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  • Edited By.: Kunal Tewatia,
  • Date:
  • 24/08/2026 11:09:14 am
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: सरकार की ओर से गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन सेमरियावां ब्लॉक के इनायतपुर गांव से एक ऐसा मामला सामने आया है,

विस्तार

उत्तर प्रदेश: सरकार की ओर से गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन सेमरियावां ब्लॉक के इनायतपुर गांव से एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां एक गरीब परिवार वर्षों से पक्के आशियाने का इंतजार कर रहा है। परिवार का कहना है कि करीब 10 वर्षों से वह पक्के मकान की आस लगाए हुए है, लेकिन अब तक उसकी उम्मीद पूरी नहीं हो सकी। इनायतपुर निवासी इंद्रेश पुत्र स्वर्गीय कल्पनाथ का परिवार आर्थिक तंगी के बीच जीवन यापन कर रहा है। परिवार के मुताबिक, मजबूरी में कभी पन्नी तानकर तो कभी किराए के मकान में रहकर जिंदगी गुजारनी पड़ रही है। परिजनों का कहना है कि वह करीब 10 वर्षों से महज 500 रुपये प्रतिमाह किराया देकर रहने को मजबूर हैं।

इंद्रेश की पत्नी इसलामती ने परिवार की पीड़ा बयां करते हुए बताया कि पक्के मकान के लिए ग्राम प्रधान से लेकर ब्लॉक के जिम्मेदार अधिकारियों तक कई बार गुहार लगाई गई। हर बार यह उम्मीद जगी कि शायद अब परिवार को सिर छिपाने के लिए पक्की छत मिल जाएगी, लेकिन वर्षों बीतने के बाद भी इंतजार खत्म नहीं हुआ। बरसात के दिनों में पन्नी और अस्थायी व्यवस्था के सहारे रहना परिवार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। वहीं गर्मी और ठंड के मौसम में भी परिवार को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। परिवार ने गांव की राजनीति का शिकार होने का भी आरोप लगाया है।

परिवार का कहना है, “सरकार गरीबों को पक्के मकान दे रही है, लेकिन हमारी बारी आखिर कब आएगी? हम भी इसी देश के नागरिक हैं और हमें भी सुरक्षित छत चाहिए। वर्षों से पक्के मकान का सपना आंखों में लिए यह परिवार अब जिम्मेदारों की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है। सवाल यह है कि आखिर इस बेबस परिवार की सुध कब ली जाएगी और “मेरी भी सुनो सरकार, मुझे भी दे दो पक्का मकान” की पुकार कब तक अनसुनी रहेगी। बोलीं इसलामती हमने कई बार प्रधान और ब्लॉक के अधिकारियों से पक्के मकान के लिए गुहार लगाई, लेकिन आज तक कोई मदद नहीं मिली। सरकार से बस इतनी मांग है कि हमारे परिवार को भी रहने के लिए एक सुरक्षित पक्का मकान मिल जाए। 


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