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मध्य प्रदेश: गुरु रविदास मंदिर में बैठक के बाद लिया फैसला, पहचान और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए जुटेगा समाज
- Photo by : social media
संक्षेप
मध्य प्रदेश: करनाल में सरकारी प्रमाण-पत्रों से ‘चमार’ शब्द हटाकर ‘मेघवाल’ दर्ज करने की सिफारिश के विरोध में 12 सितंबर 2026 को करनाल के फवारा पार्क में प्रदेश स्तरीय चमार सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।
विस्तार
मध्य प्रदेश: करनाल में सरकारी प्रमाण-पत्रों से ‘चमार’ शब्द हटाकर ‘मेघवाल’ दर्ज करने की सिफारिश के विरोध में 12 सितंबर 2026 को करनाल के फवारा पार्क में प्रदेश स्तरीय चमार सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन को लेकर करनाल स्थित गुरु रविदास मंदिर में समाज के बुद्धिजीवियों, सामाजिक प्रतिनिधियों और युवाओं की महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें सरकार के प्रस्ताव पर चर्चा करते हुए आगे की रणनीति तैयार की गई। बताया गया कि 23 अगस्त को हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रेवाड़ी के बावल में आयोजित एक कार्यक्रम में सरकारी प्रमाण-पत्रों से ‘चमार’ शब्द हटाकर ‘मेघवाल’ दर्ज करने संबंधी सिफारिश केंद्र सरकार को भेजने की बात कही थी। इस घोषणा के बाद समाज के कई प्रतिनिधियों ने इसका विरोध जताया है। बैठक में मौजूद प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि सरकार के प्रस्ताव के विरोध में 12 सितंबर, शनिवार को फवारा पार्क, करनाल में प्रदेश स्तरीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार सम्मेलन का उद्देश्य समाज की ऐतिहासिक पहचान, सम्मान और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लोकतांत्रिक तरीके से सरकार के सामने रखना है। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि ‘चमार’ शब्द समाज के इतिहास, संघर्ष, पहचान और स्वाभिमान से जुड़ा विषय है। उनका कहना है कि किसी भी समुदाय की पहचान से जुड़े नाम में बदलाव से पहले समाज की भावनाओं और सहमति को ध्यान में रखा जाना चाहिए। प्रतिनिधियों ने प्रदेशभर के समाज के लोगों, सामाजिक संगठनों, प्रबुद्ध नागरिकों और युवाओं से 12 सितंबर को अधिक से अधिक संख्या में फवारा पार्क पहुंचने की अपील की। उन्होंने कहा कि सम्मेलन के माध्यम से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग और आपत्ति सरकार के समक्ष रखी जाएगी। बैठक में एडवोकेट सोनिया तंवर, एडवोकेट अमित तंवर, एडवोकेट मान सिंह, एडवोकेट रूबी, ब्यान चौधरी, उदय सिंह मुंडे, सुरेंद्र प्योंत, प्रदीप गुलशन, रोहतास, कुलदीप, संजीव, कृष्ण, सुनील कुमार और चंदेश सहित कई सामाजिक प्रतिनिधि मौजूद रहे।
